back to top
21.1 C
New Delhi
Sunday, March 8, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

इजरायल-ईरान संघर्ष के बीच करेंसी मार्केट में उथल-पुथल, देखें दोनों देशों में कौन है आर्थिक रूप से मजबूत?

डॉलर के मुकाबले इजरायली शेकेल मजबूत और स्थिर है, जबकि प्रतिबंधों व ज्यादा महंगाई दर के कारण ईरानी रियाल काफी कमजोर स्थिति में है।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच इजरायल और ईरान आमने-सामने हैं। सैन्य गतिविधियों और आपातकाल की घोषणाओं के बीच दुनिया की नजर अब दोनों देशों की आर्थिक मजबूती पर भी टिक गई है। किसी भी देश की आर्थिक स्थिति का एक बड़ा पैमाना उसकी मुद्रा की ताकत होती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इजरायल की मुद्रा ज्यादा मजबूत है या ईरान की? डॉलर के मुकाबले विनिमय दर इस सवाल का सीधा संकेत देती है।

डॉलर के मुकाबले किसकी करेंसी भारी?

ताजा विनिमय दर के अनुसार 1 अमेरिकी डॉलर लगभग 3.14 इजरायली न्यू शेकेल के बराबर है। वहीं ओपन मार्केट में 1 डॉलर करीब 16,64,000 ईरानी रियाल के बराबर ट्रेड कर रहा है। यह अंतर बेहद बड़ा है और साफ दिखाता है कि शेकेल की वैल्यू रियाल की तुलना में कहीं अधिक मजबूत है। किसी मुद्रा की ताकत इस बात पर भी निर्भर करती है कि उस देश की अर्थव्यवस्था कितनी स्थिर है, विदेशी निवेश कितना आ रहा है और महंगाई दर किस स्तर पर है। इन पैमानों पर इजरायल फिलहाल ईरान से आगे दिखाई देता है।

क्यों मजबूत है इजरायल की मुद्रा?

इजरायल की अर्थव्यवस्था टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी, डिफेंस और इनोवेशन सेक्टर पर आधारित है। देश को दुनिया के प्रमुख टेक हब में गिना जाता है। यहां से होने वाला टेक एक्सपोर्ट और विदेशी निवेश अरबों डॉलर का फॉरेन करंसी इनफ्लो सुनिश्चित करता है। इसके अलावा इजरायल के पास करीब 212.93 बिलियन डॉलर का मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार है, जो वैश्विक अस्थिरता के समय करेंसी को सहारा देता है। नियंत्रित महंगाई दर और स्थिर बैंकिंग सिस्टम भी शेकेल में भरोसा बनाए रखते हैं।

क्यों कमजोर पड़ गया ईरानी रियाल?

ईरान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के दबाव में है। तेल निर्यात पर पाबंदियां, बैंकिंग सिस्टम तक सीमित पहुंच और घटता विदेशी निवेश रियाल पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं। महंगाई दर लगभग 48 प्रतिशत से ऊपर रहने के कारण लोगों की क्रय शक्ति कमजोर हुई है। साथ ही, बड़े पैमाने पर कैपिटल आउटफ्लो और डुअल एक्सचेंज रेट सिस्टम ने आर्थिक असंतुलन बढ़ाया है। इन कारणों से रियाल की वैल्यू लगातार गिरावट के दबाव में है।

Advertisementspot_img

Also Read:

Iran-Israel War का भारत पर क्या होगा असर, कैसे कच्चे तेल की कीमतों को करेगा प्रभावित?

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। अमेरिका और इजरायल ने शनिवार को ईरान पर संयुक्त सैन्य कार्रवाई की, जिससे मध्यपूर्व में तनाव चरम पर पहुँच गया है।...
spot_img

Latest Stories

गिया नाम का मतलब-Gia Name Meaning

Meaning of Gia / गिया नाम का मतलब :...

फिल्म ‘केरला स्टोरी 2’ ने 8 वें दिन दिखाया कमाल, जानिए बॉक्स ऑफिस कलेक्शन

नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। 'केरला स्टोरी' के बाद फिल्म...

झुग्गी में रहने वालों के लिए खुशखबरी! अब मिलेंगे आधुनिक फ्लैट, अस्पताल से मार्केट तक मिलेंगी कई सुविधाएं

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। दिल्ली में झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले...

Flipkart में छंटनी: परफॉर्मेंस रिव्यू के बाद 300 कर्मचारियों को निकाला, IPO की तैयारी के बीच बड़ा फैसला

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। Flipkart ने अपने सालाना परफॉर्मेंस रिव्यू...