नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच फिलहाल 2 हफ्तों के लिए सीजफायर का ऐलान किया गया है। इस फैसले के बाद वैश्विक स्तर पर राहत की लहर जरूर देखी जा रही है, खासकर इसलिए क्योंकि इससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के दोबारा खुलने की उम्मीद जगी है, जहां से दुनिया के करीब 20% तेल की सप्लाई गुजरती है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह शांति स्थायी नहीं, बल्कि सिर्फ एक अस्थायी विराम है।
ट्रंप का दावा: मिशन पूरा, ईरान का जवाब जंग खत्म नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर को बड़ी कूटनीतिक सफलता बताया है और कहा कि अमेरिका अपने सैन्य उद्देश्यों को हासिल कर चुका है। वहीं, ईरान ने साफ कर दिया है कि यह युद्धविराम स्थायी नहीं है और उसकी शर्तें पूरी होने तक ही यह लागू रहेगा। हालांकि दोनों देशों ने युद्धविराम पर सहमति जताई है, लेकिन खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां अभी भी जारी हैं। इजरायल द्वारा हमले जारी रहने और मिसाइल-ड्रोन गतिविधियों के चलते स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं मानी जा सकती।
होर्मुज स्ट्रेट बना सबसे बड़ा मुद्दा
इस पूरे विवाद के केंद्र में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज है। अमेरिका चाहता है कि इस जलमार्ग को तुरंत और सुरक्षित तरीके से खोला जाए, जबकि ईरान ने इसे अपनी रणनीतिक पकड़ में रखते हुए शर्तों के साथ खोलने की बात कही है। ईरान ने सीजफायर को स्थायी शांति में बदलने के लिए 10 शर्तें रखी हैं। इनमें अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाना, जब्त संपत्तियों की वापसी और युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई जैसी मांगें शामिल हैं। इसके साथ ही ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी स्पष्ट रुख अपनाया है। ईरान का कहना है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को जारी रखेगा, जबकि डोनाल्ड ट्रंप इसे पूरी तरह खत्म करने की बात पर अड़े हुए हैं। यही मुद्दा दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है।
मध्यस्थों की भूमिका और पाकिस्तान की एंट्री
इस सीजफायर को कराने में पाकिस्तान की भूमिका अहम बताई जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच बातचीत इस्लामाबाद में हो सकती है, जहां अगले दो हफ्तों में बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह तुरंत जवाब देगा। इससे साफ है कि भरोसे की कमी अभी भी बनी हुई है और किसी भी छोटी घटना से तनाव फिर बढ़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले 14 दिन बेहद अहम होंगे। इसी दौरान यह तय होगा कि यह सीजफायर स्थायी शांति में बदलता है या फिर संघर्ष एक बार फिर तेज हो जाता है। फिलहाल सीजफायर से दुनिया को राहत जरूर मिली है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि युद्ध पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। कई बड़े मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं और हालात कभी भी बदल सकते हैं। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि यह शांति नहीं, बल्कि एक अस्थायी ठहराव है।





