नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव अब और गंभीर होता नजर आ रहा है। हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि क्षेत्र में किसी भी समय बड़ा सैन्य टकराव हो सकता है। इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के ताजा बयान ने माहौल को और गरमा दिया है।
होर्मुज स्ट्रेट बना टकराव की वजह
ट्रंप ने ईरान को साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर वह समझौते के लिए तैयार नहीं होता और होर्मुज स्ट्रेट को नहीं खोलता, तो अमेरिका कड़ी सैन्य कार्रवाई कर सकता है। उन्होंने संभावित हमले का समय भी सार्वजनिक करते हुए कहा कि मंगलवार रात 8 बजे कार्रवाई हो सकती है, जो भारतीय समय के अनुसार बुधवार सुबह के आसपास होगा। ट्रंप ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि ईरान के पास समझौता करने का पर्याप्त समय है, लेकिन अगर वह पीछे नहीं हटता, तो अमेरिका उसके अहम ठिकानों को निशाना बना सकता है। उन्होंने इशारा किया कि पावर प्लांट और पुल जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर टारगेट पर हो सकते हैं।
दरअसल, इस पूरे विवाद की जड़ होर्मुज स्ट्रेट है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल सप्लाई मार्गों में से एक है। इस मार्ग के बंद होने या बाधित होने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है। इसी वजह से अमेरिका लगातार इसे खोलने का दबाव बना रहा है। इससे पहले भी ट्रंप ने ईरान को कड़ी भाषा में चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर होर्मुज स्ट्रेट को समुद्री यातायात के लिए नहीं खोला गया, तो ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उनके बयानों में इस्तेमाल की गई सख्त भाषा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।
ईरान का पलटवार
वहीं, ईरान की ओर से भी इस पर तीखी प्रतिक्रिया आई है। ईरानी संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने अमेरिका पर पलटवार करते हुए कहा कि ऐसे कदम पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका के फैसले हालात को और बिगाड़ रहे हैं और इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों देशों के बीच तनाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। खासकर तेल की कीमतों, व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा प्रभाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल, दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या आखिरी समय में कोई समझौता होता है या फिर यह टकराव एक बड़े युद्ध में बदल जाता है।





