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Wednesday, May 13, 2026
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भारत से मुंह मोड़ रहे विदेशी पर्यटक: US-ईरान तनाव से टूरिज्म सेक्टर को लगा बड़ा झटका, 18,000 करोड़ का हुआ नुकसान

US-ईरान तनाव का असर भारत के टूरिज्म सेक्टर पर साफ दिख रहा है। विदेशी पर्यटकों की संख्या में गिरावट, एविएशन इंडस्ट्री को ₹18,000 करोड़ का नुकसान और रेस्तरां कारोबार पर दोहरी मार पड़ी है। जानें पूरी रिपोर्ट, आंकड़े और इस संकट का भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ रहा है।

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध और खासकर अमेरिका-ईरान के बीच तनाव का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था के अहम सेक्टर टूरिज्म, एविएशन और होटल-रेस्तरां कारोबार पर साफ दिखने लगा है। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) की ताज़ा रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि इस भू-राजनीतिक संकट से देश को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।

विदेशी पर्यटकों में भारी गिरावट

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या में 15 से 20 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है। वैश्विक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय यात्री अब यात्रा करने से बच रहे हैं या सुरक्षित और नजदीकी देशों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

एविएशन सेक्टर को सबसे ज्यादा नुकसान

हवाई यात्रा इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को रद्द करना पड़ा है, जबकि कई फ्लाइट्स के रूट बदल दिए गए हैं। इसके चलते यात्रा समय 2 से 4 घंटे तक बढ़ गया है और एयरलाइंस का ईंधन खर्च भी काफी बढ़ गया है। रिपोर्ट के अनुसार, एविएशन सेक्टर को अब तक करीब ₹18,000 करोड़ का नुकसान हो चुका है। ईंधन की बढ़ती लागत और लंबी दूरी की उड़ानों ने एयरलाइंस कंपनियों की कमर तोड़ दी है।

होटल इंडस्ट्री पर दबाव

टूरिज्म और होटल सेक्टर, जो भारत की जीडीपी में लगभग 8% योगदान देता है और 4 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार देता है, अब दबाव में है। विदेशी मेहमानों की कमी से होटल कारोबार प्रभावित हुआ है, हालांकि घरेलू पर्यटकों के चलते स्थिति पूरी तरह खराब नहीं हुई है।

रेस्तरां कारोबार पर दोहरी मार

रिपोर्ट में सबसे ज्यादा असर रेस्तरां सेक्टर पर बताया गया है। करीब 10% रेस्तरां बंद हो चुके हैं, जबकि हर महीने कारोबार में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। खाद्य सामग्री, ट्रांसपोर्ट और बिजली की लागत बढ़ने से छोटे और मध्यम स्तर के रेस्तरां संचालकों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है।

भारतीय पर्यटक भी बदल रहे प्लान

रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय पर्यटक भी अब लंबी दूरी के बजाय नजदीकी देशों जैसे थाईलैंड, सिंगापुर और वियतनाम की यात्रा को प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे इंटरनेशनल ट्रैवल इंडस्ट्री पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है। इस चुनौतीपूर्ण समय में घरेलू पर्यटन सेक्टर ने राहत दी है। देश के भीतर घूमने वाले लोग होटल, ट्रैवल और फूड इंडस्ट्री को सपोर्ट दे रहे हैं, जिससे इस सेक्टर को पूरी तरह गिरने से बचाया जा सका है। PHDCCI ने सरकार को स्थिति सुधारने के लिए कई सुझाव दिए हैं नए हवाई मार्ग विकसित किए जाएं एविएशन फ्यूल (ATF) पर टैक्स कम किया जाए छोटे कारोबारियों को सस्ता लोन उपलब्ध कराया जाए वीजा प्रक्रिया को आसान बनाया जाए भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमोट किया जाए। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध ने भारत के टूरिज्म और एविएशन सेक्टर को बड़ा झटका दिया है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत घरेलू मांग और सही नीतियों के जरिए यह सेक्टर जल्द ही पटरी पर लौट सकता है।

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