नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान को लेकर एक दिलचस्प सवाल चर्चा में है क्या वहां हिंदू रहते हैं? रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान में लगभग 20,000 से 40,000 हिंदू रहते हैं, जो देश की कुल आबादी का बहुत छोटा हिस्सा (0.05% से भी कम) है। इसके अलावा, भारत सरकार के आंकड़ों के मुताबिक करीब 9,000 भारतीय नागरिक (छात्र, व्यापारी और मजदूर) भी फिलहाल ईरान में रह रहे हैं।
बंदर अब्बास का ऐतिहासिक विष्णु मंदिर
ईरान में हिंदू विरासत की सबसे बड़ी पहचान बंदर अब्बास शहर में स्थित एक प्राचीन विष्णु मंदिर है। इस मंदिर को स्थानीय भाषा में इबादतगाह-ए-हिंदू कहा जाता है। इसका निर्माण 1892 में गुजराती व्यापारियों ने कराया था यहां भारतीय और ईरानी वास्तुकला का अनोखा मिश्रण देखने को मिलता है आज यह मंदिर नियमित पूजा के बजाय सांस्कृतिक विरासत स्थल और संग्रहालय के रूप में संरक्षित है।
चाबहार में भी हिंदू मंदिर के निशान
चाबहार बंदरगाह शहर के पास भी एक हिंदू मंदिर होने के प्रमाण मिलते हैं। ऐसा माना जाता है कि इसे भी भारतीय व्यापारियों ने ही बनवाया था। पुराने समय में ये मंदिर सिर्फ पूजा के लिए नहीं बल्कि भारतीय समुदाय के सांस्कृतिक केंद्र भी थे, जहां लोग मिलते-जुलते और त्योहार मनाते थे।
तेहरान और अन्य शहरों में छोटे पूजा स्थल
ईरान की राजधानी तेहरान सहित इस्फहान और जहेदान जैसे शहरों में हिंदुओं के छोटे-छोटे पूजा स्थल होने की जानकारी मिलती है। यहां रहने वाले हिंदू समुदाय के लोग दीवाली धार्मिक अनुष्ठान सामूहिक पूजा जैसे कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित करते हैं। हालांकि ईरान में हिंदू आबादी बहुत कम है, लेकिन वहां मौजूद मंदिर और पूजा स्थल भारत और ईरान के पुराने व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंधों की गवाही देते हैं। ये स्थल सिर्फ धार्मिक जगह नहीं, बल्कि दो प्राचीन सभ्यताओं के इतिहास और जुड़ाव के प्रतीक हैं।





