नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। अमेरिका और ईरान के बीच घोषित 2 हफ्ते के सीजफायर का भारत ने स्वागत किया है। बुधवार को विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर उम्मीद जताई कि यह कदम पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की दिशा में अहम साबित होगा।
भारत का पहला आधिकारिक बयान
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, “हम इस युद्धविराम का स्वागत करते हैं और आशा करते हैं कि इससे मिडिल ईस्ट में स्थायी शांति स्थापित होगी। भारत ने एक बार फिर दोहराया कि किसी भी संघर्ष का समाधान संवाद और कूटनीति से ही संभव है।
ट्रंप के ऐलान के बाद रुकी जंग
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ सीजफायर का ऐलान किया, जिस पर तेहरान ने भी सहमति जताई। करीब 40 दिनों से जारी संघर्ष फिलहाल 2 हफ्तों के लिए रुक गया है, जिससे पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव कुछ कम हुआ है। इस सीजफायर का पाकिस्तान समेत कई देशों ने स्वागत किया है। अब भारत की प्रतिक्रिया भी सामने आने के बाद इसे वैश्विक समर्थन मिलता दिख रहा है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस संघर्ष ने आम लोगों को भारी नुकसान पहुंचाया है। साथ ही वैश्विक ऊर्जा सप्लाई और व्यापार नेटवर्क भी प्रभावित हुए हैं। खासतौर पर होरमुज़ जलडमरूमध्य का जिक्र करते हुए भारत ने कहा कि यहां से निर्बाध आवाजाही जरूरी है, क्योंकि यह दुनिया के तेल सप्लाई का बड़ा रास्ता है।
कैसे शुरू हुई थी जंग?
यह संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त सैन्य कार्रवाई की। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई बड़े अधिकारियों की मौत हो गई। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे तनाव और बढ़ गया। करीब 40 दिनों तक चले इस संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच सीजफायर पर सहमति बनी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दी गई सख्त चेतावनी की समयसीमा खत्म होने से कुछ ही घंटे पहले यह समझौता हुआ। भारत ने भले ही इस कदम का स्वागत किया हो, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थायी समाधान नहीं, बल्कि एक अस्थायी विराम है।




