नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है। हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को भी बाजार रेड जोन में खुला। वैश्विक अनिश्चितता, अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के चलते निवेशकों में डर का माहौल बना हुआ है। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 326 अंक टूटकर 75,688 के स्तर पर खुला। वहीं एनएसई का निफ्टी भी 93 अंक फिसलकर 23,723 के स्तर पर कारोबार शुरू करता नजर आया। लगातार दूसरे दिन बाजार में कमजोरी देखने को मिली है।
PM मोदी ने दोहराई अपील
इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर देशवासियों से अपील की है कि वे फिलहाल गैर-जरूरी सोना खरीदने से बचें और पेट्रोल-डीजल का इस्तेमाल समझदारी के साथ करें। प्रधानमंत्री ने लोगों को सोलर एनर्जी, इथेनॉल ब्लेंडिंग और अन्य क्लीन फ्यूल विकल्प अपनाने की सलाह दी है ताकि देश की विदेशी मुद्रा और अर्थव्यवस्था पर दबाव कम किया जा सके।
क्यों गिर रहा है शेयर बाजार?
विशेषज्ञों के मुताबिक शेयर बाजार में गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं। सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ रहा है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में तेल महंगा होने से महंगाई और व्यापार घाटा बढ़ने का खतरा रहता है। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता भी बाजार पर दबाव बना रही है।
एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख
मंगलवार को एशियाई बाजारों में ज्यादातर इंडेक्स बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। जापान का Nikkei 225 करीब 0.2 फीसदी मजबूत हुआ, जबकि Topix Index में 0.54 फीसदी की तेजी रही। दक्षिण कोरिया का Kospi इंडेक्स 2 फीसदी से ज्यादा उछला। वहीं ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 लगभग सपाट कारोबार करता दिखा।
अमेरिकी बाजार रिकॉर्ड स्तर पर बंद
पिछले कारोबारी सत्र में अमेरिकी शेयर बाजार मजबूती के साथ बंद हुए। S&P 500 इंडेक्स 0.19 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ। Nasdaq Composite और Dow Jones में भी तेजी देखने को मिली। तीनों प्रमुख अमेरिकी इंडेक्स ने कारोबार के दौरान नया रिकॉर्ड हाई भी छुआ।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है। ब्रेंट क्रूड 104.87 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड 98.56 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता नजर आया। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं।
डॉलर मजबूत, रुपया भी संभला
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) मंगलवार सुबह बढ़त के साथ 98.01 पर पहुंच गया। वहीं भारतीय रुपया पिछले कारोबारी दिन डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर 95.31 पर बंद हुआ।
FMCG सामान भी हो सकते हैं महंगे
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर अब रोजमर्रा के सामान पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक ट्रांसपोर्ट और पैकेजिंग लागत बढ़ने से आने वाले समय में साबुन, डिटर्जेंट, बिस्किट, पैकेज्ड फूड, चाय-कॉफी और सॉफ्ट ड्रिंक्स जैसे FMCG उत्पाद महंगे हो सकते हैं। फिलहाल निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतों और सरकार के अगले कदमों पर बनी हुई है।





