नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। प्रधानमंत्री Narendra Modi की लोगों से एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील के बाद देशभर में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। PM मोदी ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात, खासकर अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारत को अपने विदेशी मुद्रा भंडार यानी Forex Reserves बचाने की जरूरत है। इसी वजह से उन्होंने लोगों से गैर-जरूरी गोल्ड खरीदारी टालने की अपील की।
सोने की खरीदारी से कैसे पड़ता है असर?
भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड इंपोर्ट करने वाले देशों में शामिल है। देश में इस्तेमाल होने वाला ज्यादातर सोना विदेशों से आयात किया जाता है और इसके लिए डॉलर में भुगतान करना पड़ता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक FY26 में भारत ने करीब 72 अरब डॉलर का सोना आयात किया, जो कुल इंपोर्ट बिल का बड़ा हिस्सा है। ऐसे में ज्यादा गोल्ड इंपोर्ट होने से डॉलर की मांग बढ़ती है और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है।
अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी चिंता
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा तेल आयात करके पूरा करता है, इसलिए महंगे तेल से डॉलर का खर्च और बढ़ जाता है। ऐसे में अगर गोल्ड इंपोर्ट भी ज्यादा रहे तो Current Account Deficit और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर लोग कुछ समय तक गोल्ड खरीद कम करें तो अरबों डॉलर की बचत हो सकती है।
शेयर बाजार पर भी दिखा असर
PM मोदी की अपील के बाद ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखने को मिली। Titan, Kalyan Jewellers और Senco Gold जैसी कंपनियों के शेयर दबाव में आ गए। हालांकि अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यह कदम देश की आर्थिक स्थिरता और विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के नजरिए से देखा जाना चाहिए।





