नई दिल्ली, रफ्ताार डेस्क । एशिया कप 2025 फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ तिलक वर्मा ने नाबाद 69 रनों की यादगार पारी खेलकर भारत को चैंपियन बनाया। उनकी इस मैच विनिंग पारी ने न सिर्फ टीम इंडिया की जीत सुनिश्चित की बल्कि उन्हें रातोंरात चर्चा का केंद्र बना दिया है।
28 सितंबर को दुबई में खेले गए हाई-वोल्टेज फाइनल में तिलक वर्मा ने 53 गेंदों पर नाबाद 69 रन बनाए, जिसमें 3 चौके और 4 छक्के शामिल रहे। उनकी इस पारी की बदौलत टीम इंडिया ने आखिरी ओवर में रोमांचक जीत दर्ज कर एशिया कप 2025 का खिताब अपने नाम किया।
”भारत की बराबरी नहीं कर सकता पाक”
एशिया कप फाइनल के हीरो तिलक वर्मा खिताब जीतने के बाद भारत लौट आए हैं। 29 सितंबर को हैदराबाद पहुंचने पर उनका जोरदार स्वागत किया गया। इस दौरान मीडिया से बातचीत में तिलक ने कप्तान सूर्यकुमार यादव की बात दोहराते हुए कहा कि मौजूदा समय में पाकिस्तान भारत की बराबरी करने की स्थिति में नहीं है।
”भारत-पाकिस्तान की कोई टक्कर नहीं”
मीडिया से बातचीत में तिलक वर्मा ने कहा कि वह कप्तान सूर्यकुमार यादव की इस राय से सहमत हैं कि अब भारत-पाकिस्तान कोई बड़ी प्रतिद्वंद्विता नहीं रही। उनके मुताबिक, पाकिस्तान भारतीय टीम के सामने टिकने लायक नहीं है। हालांकि उन्होंने माना कि पाकिस्तान ने अलग-अलग प्लान जरूर बनाए थे और भारत-पाकिस्तान मैच में दबाव हमेशा रहता है।
तिलक वर्मा ने रोमांचक फाइनल पर कहा कि, 147 रन के लक्ष्य का पीछा करते वक्त उन पर दबाव जरूर था, लेकिन उनके दिमाग में सिर्फ देश था। उन्होंने बताया कि 140 करोड़ भारतीयों के लिए जीत हासिल करना ही उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता थी और उसी सोच ने उन्हें संभलकर खेलने की ताकत दी।
”पाक की स्लेजिंग पर ध्यान नहीं दिया”
तिलक वर्मा उस समय क्रीज पर उतरे जब भारत का स्कोर सिर्फ 10 रन पर दो विकेट था और जल्द ही टीम 20/3 पर पहुंच गई। उन्होंने बताया कि मुश्किल हालात में पाकिस्तानी खिलाड़ी मानसिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहे थे। जैसे ही भारत ने तीन विकेट गंवाए, पाकिस्तान के खिलाड़ी हावी होने लगे और माहौल चुनौतीपूर्ण हो गया।
”देश को जिताना सबसे अहम”
तिलक वर्मा ने बताया कि, फाइनल में पाकिस्तान खिलाड़ियों ने खूब स्लेजिंग की, लेकिन उनके दिमाग में सिर्फ यह था कि उन्हें इसमें नहीं उलझना है, क्योंकि देश को जिताना सबसे अहम था। उन्होंने कहा कि उन्होंने बल्ले से जवाब दिया। तिलक ने यह भी जताया कि जब प्रधानमंत्री मोदी ने उनकी पारी को “ऑपरेशन सिंदूर” की तर्ज पर “ऑपरेशन तिलक” कहा, तो यह उनके लिए बेहद गर्व और खुशी का पल था।





