नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । बिहार विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। पार्टी राजस्थान और मध्य प्रदेश की तर्ज पर बड़े और लोकप्रिय नेताओं को उन क्षेत्रों में उतारने पर विचार कर रही है, जहां उसकी पकड़ कमजोर है। यह कदम चुनावी मोर्चे पर उसकी दावेदारी मजबूत कर सकता है।
बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी मौजूदा सांसद, पूर्व सांसद, विधान पार्षद और केंद्रीय मंत्रियों तक को मैदान में उतार सकती है। इसका मकसद जातीय समीकरण साधना और एंटी-इनकंबेंसी को कम करना है। पहले कुछ राज्यों में ऐसा किया गया, जहां नतीजे मिले-जुले रहे। कहीं फायदा हुआ, कहीं खास सफलता नहीं।
चुनावी मैदान में उतर सकते हैं ये नेता
सूत्रों के अनुसार, बिहार में बीजेपी चुनावी रणनीति में बड़े नामों को उतार सकती है। इनमें पूर्व सांसद सुशील सिंह (राजपूत), पूर्व केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव (यादव), अश्विनी चौबे (ब्राह्मण), संजय पासवान (दलित), शाहनवाज हुसैन (मुस्लिम), केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय (यादव), सतीश चंद्र दूबे (ब्राह्मण), डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी (कुशवाहा), मंत्री जनक राम (दलित), हरि सहनी (मल्लाह) और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे (ब्राह्मण) शामिल हैं।
तेजस्वी के नेतृत्व में बनेंगी सरकार – मृत्युंजय
बिहार में बीजेपी की इस रणनीति पर विपक्ष ने हमला शुरू कर दिया है। राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि बीजेपी घबराई हुई है क्योंकि इस बार जनता बदलाव चाहती है। उन्होंने कहा कि चाहे बड़े चेहरे उतारे जाएं, बिहार की जनता तेजस्वी यादव के नेतृत्व में सरकार बनाने का फैसला कर चुकी है और यह चुनाव संविधान व लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई है।
वहीं, बीजेपी प्रवक्ता कुंतल कृष्ण ने कहा कि, 2025 का यह चुनाव निर्णायक साबित होगा। पार्टी का नेतृत्व तय करेगा कि कौन नेता मैदान में उतरेगा। उन्होंने कहा, “जनता जिसे चाहेगी, उसे मौका मिलेगा। बिहार सुशासन की राह पर है और वापस जंगल राज में लौटना नहीं चाहेगा।”
लोकप्रिय चेहरें उताराने के पीछे बीजेपी की क्या है रणनीति
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि, BJP द्वारा लोकप्रिय नेताओं को चुनावी मैदान में उतारना रणनीति का हिस्सा है। इससे कमजोर सीटों पर पकड़ मजबूत होगी और जातीय समीकरण भी साधे जा सकते हैं। उनके अनुसार, ये नेता अपने समाज में प्रभाव रखते हैं, जिससे वोटर आकर्षित होंगे और एंटी-इनकंबेंसी का असर कम होगा।
यूं कहें कि, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में बीजेपी बड़े दांव खेलने की तैयारी में है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह रणनीति पार्टी को सफलता दिलाती है या विपक्ष की सक्रियता और जनता के मूड के सामने कमजोर साबित होती है।





