नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। आज यारों के यार, फिल्म और सियासत के कॉकटेल अमर सिंह (Amar Singh) की चौथी पुण्यतिथि है। उनके बारे में कहा जाता था कि वो रिश्ते निभाना ही नहीं बल्कि जीना जानते थे। कॉरपोरेट से लेकर गंवई लोगों तक में उनकी स्वीकार्यता थी। बलिया, बनारस और गाजीपुर में जनसभा करने के बाद वो रात को ग्लैमरस पार्टियों में शामिल होते थे। एक समय ऐसा भी आया जब वो राजनीति के गलियारों में अपरिहार्य हो गए थे। उन्हें फिल्मों का शौक था। उन्हें घूमना पसंद था। ठाकुरों की ठसक थी। जिससे व्यक्तिगत रिश्ते होते वो उसकी जान बन जाते थे। जिससे उनकी ठन जाती थी उसकी सार्वजनिक रूप से लानत करने में भी संकोच नहीं करते थे। अमर सिंह लंबी बिमारी से जूझते हुए सिंगापुर के एक अस्पताल में उन्होंने 1 अगस्त 2020 को अंतिम सांस ली।
आजमगढ़ के रहने वाले थे अमर सिंह
अमर सिंह मूलरूप से आजमगढ़ उत्तर प्रदेश के रहने वाले थे। उनका लालन पालन कोलकाता में हुआ था। उनके पिता बिजनेस में थे और चाहते थे कि अमर सिंह भी परिवार का कारोबार संभालें। अमर सिंह ने कोलकाता के सेंट जेवियर स्कूल से पढ़ाई की थी। वहीं से उन्होंने लॉ कॉलेज से डिग्री ली थी। उन्हें राजनीति में लाने का श्रेय उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह को जाता है। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि एक बार वीर बहादुर सिंह पश्चिम बंगाल की दुर्गापूजा देखने गए थे। अमर सिंह वहीं पर वीर बहादुर सिंह से मिले और उन्हें कोलकाता की दुर्गापूजा दिखाई। यहीं से उनकी दोस्ती परवान चढ़ती चली गई।
पूर्व सीएम के आवास पर मुलायम सिंह से हुई थी पहली मुलाकात
इसी बीच वीर बहादुर सिंह के लखनऊ के आवास पर अमर सिंह की मुलायम सिंह से मुलाकात हुई, लेकिन असली परिचय उनके मित्र ईशदत्त यादव ने कराया था। ये बाद अमर सिंह ने बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में बताई थी। जिसके बाद उन्होंने मुलायम सिंह यादव से मुलाकात की और फिर दोनों की दोस्ती परवान चढ़ते चली गई।
समाजवादी पार्टी को दिया नया कलेवर
समाजवादी पार्टी ( SP) में आने के बाद अमर सिंह ने पार्टी को नई ऊचाइयों पर ले गए। 1996 में पहली बार राज्यसभा भेजे गए। 2002 में उन्हें पार्टी का महासचिव बनाया गया। इसी के बाद उन्होंने पार्टी को नया कलेवर दिया। पार्टी में फिल्मी सितारों को ज्वाइन कराया। जिस समाजवादी पार्टी की पहचान गंवई पार्टी के तौर पर होती थी। उस पार्टी को नया कलेवर दिया। वो अमर सिंह ही थे जिन्होंने फिल्मी सितारों से लेकर कॉरपोरेट तक के लोगों में समाजवादी पार्टी की स्वीकार्यता बढ़ाई।
अमर सिंह की महफिल में लगता था उद्योगपतियों व फिल्मी सितारों का जमावड़ा
2003-2007 के बीच मुलायम सिंह यादव जब यूपी के सीएम बने तब अमर सिंह ने पार्टी में उद्योगपतियों और बॉलिवुड के लोगों का जमावड़ा करा दिया। इसके बाद समाजवादी पार्टी की पकड़ दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र तक होती गई।
2007 विधानसभा चुनाव के बाद बदल गई स्थिति
हालांकि सभी दिन एक समान नहीं होते हैं। 2007 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की हार के बाद अमर सिंह का करियर ढलान पर आने लगा। पार्टी की हार का जिम्मेदार अमर सिंह को ठहराया गया। 2009 के लोकसभा चुनाव तक आते आते सपा और अमर सिंह के रिश्ते तल्ख होते चले गए। पार्टी में अमर सिंह का विरोध तेज हो गया। जिसके बाद 2010 में अमर सिंह ने सपा के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया।
2008 में कांग्रेस की सरकार को गिरने से बचाई
अमर सिंह का एक और किस्सा बहुत मशहूर है। दरअसल साल 2008 में अमेरिका से न्यूक्लियर डील से नाराज वामपंथी पार्टियों ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया। जिसके बाद कांग्रेस गठबंधन की सरकार गिरने के कगार पर आ गई। दिल्ली में स्थित बड़े-बड़े नेताओं को जब लग गया कि अब सरकार को गिरने से कोई नहीं रोक सकता। तो उन्होंने अमर सिंह से संपर्क किया। जिसके बाद अमर सिंह ने इस संबंध में मुलायम सिंह से बात की। दरअसल मुलायम सिंह पहले इसके लिए तैयार नहीं थे। लेकिन जब अमर सिंह मुलायम को लेकर तत्कालीन राष्ट्रपति के कलाम के पास पहुंचे तो मुलायम के तेवर बदल चुके थे। इसके बाद कांग्रेस गठबंधन की सरकार बच पाई।
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