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Saturday, March 7, 2026
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Union Budget 2025: साल 1973 के इंदिरा सरकार के बजट को क्यों कहा गया ‘ब्लैक बजट’?

भारत के ऐतिहासिक बजट घोषणाओं में से एक था यशवंतराव बी चव्हाण द्वारा पेश किया बजट, जब भारत की प्रधानमंत्री रही इंदिरा गांधी और उनके कार्यकाल में वित्त मंत्री रहे यशवंतराव बी चव्हाण द्वारा पेश किया गया

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। हर साल की तरह इस बार भी यूनियन बजट एक फरवरी को वित्त मंत्री संसद में पेश करेंगी। लेकिन क्या आपको मालूम है भारत में कई ऐतिहासिक बजट पेश हुए जिसमें से एक बार के बजट को ‘ब्लैक बजट’ का नाम मिला था। वो बजट था यशवंतराव बी चव्हाण द्वारा 1973 में पेश किया गया बजट। तब इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री थीं और चव्हाण वित्त मंत्री थे।

कब पेश हुआ था Black Budget

साल 1973-74 में रहे वित्त मंत्री यशवंतराव बी चव्हाण द्वारा पेश किए गए बजट के कारण भारत सरकार को 550 करोड़ रुपये का राजकोषीय घाटा का सामना करना पड़ा था। इसी कारण इसे ब्लैक बजट कहा गया। दरअसल, साल 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद से ही भारत की आर्थिक स्थिति कमज़ोर हो गई थी। इसके बाद 1973 में सूखा पड़ने की वजह से फसल उत्पादन में भारी नुकसान उठाना पड़ा था।

पेश करने के पीछे ये है मकसद 

वहीं इस बजट पर यशवंतराव चव्हाण द्वारा ये सफाई भी पेश की गई थी जिसमें उन्होनें बताया था कि आखिर ब्लैक बजट पेश करने का मकसद क्या था। यशवंतराव ने कहा, इस बजट को पेश करने के पीछे एक ही मकसद था कि जिससे भारत देश में हुए नुकसान को अलग-अलग सरकारी योजनाओं में कटौती कर सरकारी खजाने में धन की कमी को बैलेंस किया जा सके। 

केंद्रीय बजट 2025

वहीं साल 2025 की बात करें तो अब भारत की मोदी सरकार अपनी आगामी वित्तीय वर्ष के लिए केंद्रीय बजट के लिए तैयार हो रहा है, और इस बार के बजट से मध्यम वर्ग के लिए कई नई राहत को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। ये बजट एक फरवरी को मोदी सरकार के नेतृत्व में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में केंद्रीय बजट पेश किए जाने पर कई घोषणा किए जाने की उम्मीद है। वहीं बीते साल 2023-24 की बात करें तो भारत का कुल 45,03 097 करोड़ रुपए का लगभग था।

बढ़ती महंगाई, बेरोज़गारी

इसमें  कुल व्यय में राजस्व व्यय 35,02,136 करोड़ रुपए पहुचां था। तो वही कुल व्यय 10,00,961 करोड़ रुपए हुआ था। अब इस बार देखनां होगा कि क्या निर्मला सीतारमण लोगो के उम्मीदों पर खरी उतर पाऐंगी। बढ़ती महंगाई, बेरोज़गारी और घटती खपत के बीच आमआदमी राहत की आस लगाए बैठा है। फिलहाल, अर्थव्यवस्था की रफ़्तार धीमी पड़ने से निवेशकों ने भी दूरी बनाई है व इससे रोज़गार की संभावनाएं घटी है। वहीं महंगाई से मज़दूरी और वेतन में बढ़ोतरी नहीं होने से सीमित आमदनी वाले परिवारों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा ।

राजकोषीय घाटा 

वहीं बात करें बजट की तो किसी भी देश की अर्थव्यवस्था की सेहत को दर्शानेवाला माना जाता है वहीं जब किसी देश की सरकार में कुल आय और कुल व्यय के बीच काफी अंतर आता है तो उसे देश के सरकार के राजकोषिय घाटे से जोड़ा जाता है। वही जब देश को इस आय-व्यय में फायदा होता है। व बढ़ोतरी होती है। तो इसे देश की अर्थव्यवस्था से जोड़ा जाता है। जिससे हम किसी देश में उसके अर्थव्यवस्था में बढ़ोतरी व विकास से जोड़ते है। व इसे ही देश की राष्ट्रीयकरण अर्थव्यवस्था भी कहा जाता है। 

वहीं साल 1975 इमरजेंसी से ठीक पहले ब्लैक बजट में भी कुछ अहम घोषणाएं की गई थीं। तब इंदिरा गांधी सरकार ने कोयला खदानों, बीमा कंपनियों और इंडियन कॉरपोरेशन के विकास के लिए तकरीबन 56 करोड़ रुपये फंड की घोषणा की थी। इस पर इंदिरा गांधी सरकार ने तर्क दिया था कि कोयला खदानों के राष्ट्रीयकरण से भारत के बिजली क्षेत्र में बढ़ती मांग को पूरा करने में सहायता मिलेगी।

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