back to top
29.1 C
New Delhi
Thursday, May 7, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

बीच में इंश्योरेंस पॉलिसी छोड़ी तो होगा बड़ा नुकसान! फैसला लेने से पहले जान लें पूरा सच

बीच में इंश्योरेंस पॉलिसी सरेंडर करने पर पूरी रकम वापस नहीं मिलती और जीवन बीमा कवरेज तुरंत खत्म हो जाता है। फैसला लेने से पहले सरेंडर वैल्यू और के फायदे-नुकसान का पूरा आंकलन करना जरूरी है।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बीच में इंश्योरेंस पॉलिसी छोड़ना आसान फैसला नहीं है, क्योंकि इसका सीधा असर आपकी जेब और भविष्य की सुरक्षा दोनों पर पड़ता है। कई बार आर्थिक दबाव, बदलती प्राथमिकताएं या गलत प्लानिंग के कारण लोग पॉलिसी बंद करने का सोचते हैं, लेकिन ऐसा करने से पहले पूरी तस्वीर समझना जरूरी है। पॉलिसी को तय अवधि से पहले बंद करने को ‘सरेंडर’ कहा जाता है। इस स्थिति में बीमा कंपनी पूरी जमा राशि वापस नहीं करती, बल्कि कटौतियों के बाद जो रकम मिलती है उसे सरेंडर वैल्यू कहा जाता है, जो अक्सर भरे गए कुल प्रीमियम से कम होती है।

जीवन बीमा कवरेज तुरंत खत्म हो जाता है

सबसे बड़ा नुकसान यह है कि पॉलिसी बंद करते ही जीवन बीमा कवरेज तुरंत खत्म हो जाता है। यानी भविष्य में किसी अनहोनी की स्थिति में आपके परिवार को कोई डेथ बेनिफिट नहीं मिलेगा। खासकर शुरुआती 2 से 4 साल में पॉलिसी सरेंडर करने पर ज्यादा घाटा होता है, क्योंकि उस समय प्रीमियम का बड़ा हिस्सा एजेंट कमीशन, प्रशासनिक खर्च और अन्य चार्ज में चला जाता है। एंडोमेंट, मनी-बैक या ULIP जैसी योजनाओं में मिलने वाले भविष्य के बोनस और गारंटीड रिटर्न भी बीच में छोड़ने पर समाप्त हो जाते हैं।

पॉलिसी बंद करने के बजाय ‘पेड-अप’ विकल्प

हालांकि पूरी तरह पॉलिसी बंद करने के बजाय ‘पेड-अप’ विकल्प चुना जा सकता है, जिसमें आप आगे प्रीमियम देना बंद कर देते हैं लेकिन कम बीमा राशि के साथ पॉलिसी जारी रहती है। टर्म इंश्योरेंस के मामले में स्थिति अलग है इसमें कोई सेविंग या कैश वैल्यू नहीं होती, इसलिए इसे छोड़ने पर कोई रकम वापस नहीं मिलती, केवल कवरेज खत्म होता है।

कम से कम एक साल का प्रीमियम भरा गया हो

बीमा नियामक भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) ने हाल के वर्षों में कुछ नियमों में बदलाव किए हैं, जिससे कुछ पारंपरिक पॉलिसियों में सरेंडर वैल्यू पहले से बेहतर हो सकती है, खासकर यदि कम से कम एक साल का प्रीमियम भरा गया हो।

पॉलिसी बंद करने से पहले ग्रेस पीरियड और रिवाइवल

पॉलिसी बंद करने से पहले ग्रेस पीरियड और रिवाइवल जैसे विकल्पों पर भी विचार करना चाहिए। अक्सर कंपनियां 15 से 30 दिन का ग्रेस पीरियड देती हैं और कुछ शर्तों के साथ लैप्स पॉलिसी दोबारा चालू भी की जा सकती है। इसलिए जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय अपनी पॉलिसी के नियम, सरेंडर चार्ज, भविष्य के लाभ और परिवार की सुरक्षा इन सबका संतुलित आकलन करना बेहद जरूरी है

Advertisementspot_img

Also Read:

5 लाख इंवेस्ट करे, 15 लाख मिलेगा, जानिए पोस्ट ऑफिस की कौन सी स्कीम दे रही है बंपर रिटर्न

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बैंक की तरह ही पोस्ट ऑफिस निवेश के लिए एक अन्य विकल्प है। हालांकि पोस्ट ऑफिस में लोगों का रुझान इसलिए...
Advertisementspot_img
spot_img

Latest Stories

IPL 2026 Final बेंगलुरु से छीना, BCCI का बड़ा फैसला; 3 शहरों में होंगे प्लेऑफ मुकाबले

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। Indian Premier League 2026 के प्लेऑफ...

Digital Journalism Career: 12वीं के बाद कैसे बनाएं करियर, कौन से कोर्स और स्किल्स हैं जरूरी

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क: आज के दौर में डिजिटल प्लेटफॉर्म...

बंगाल में TMC की हार के बाद Akhilesh Yadav ने I-PAC से तोड़ा करार, 2027 यूपी चुनाव से पहले बदली रणनीति

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क: समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने...

Hajj Journey: भारत से पैदल हज में कितना समय लगता है? जानिए कितना कठिन होता है ये सफर

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। हज इस्लाम धर्म का एक...

Pin Code Search

⌵ ⌵ ⌵ ⌵ Next Story Follows ⌵ ⌵ ⌵ ⌵