नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। विनेश फोगाट कुश्ती की पोस्टर गर्ल तो हमेशा से ही थीं लेकिन इन दिनों उनके राजनीति में आने की अटकलों का दौर भी शुरू हो चुका है। आज अपना जन्मदिन मना रही विनेश की जिंदगी के उन अनछुए पहलुओं पर नजर डालेंगे जो अभी तक आम जनमानस की पहुंच से दूर हैं। वह एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों समेत कई प्रतियोगिताओं में भारत का झंड़ा बुलंद कर चुकी हैं।
हरियाणा की मिट्टी में से ओलंपिक तक का सफर
हरियाणा के बलाली गांव की मिट्टी में खेलकर बड़ी हुई विनेश ने कभी सोचा नहीं होगा कि एक दिन वो अपने खेल की बदौलत स्पोर्टस आइकन बन जाएंगी। विनेश पहली बार लाइमलाइट में तब आईं जब उन्होंने 2013 में नई दिल्ली में आयोजित एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था। इसके बाद ये सिलसिला चल पड़ा। इसके बाद उन्होंने अफ्रीका में राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीता। फिर मौका आया 2014 राष्ट्रमंडल खेलों का, जिसमें उन्होंने पहला गोल्ड मेडल जीता था। सर्जरी के बाद वापस लौटी विनेश ने 2017 और 2018 में भी अपना अभूतपूर्व प्रदर्शन जारी रखा। विनेश के खाते में एक कांस्य पदक 2019 एशियाई खेलों मे भी आया था। 2020 में भी ये प्रदर्शन जारी रहा। हालांकि पेरिस ओलंपिक 2024 से उन्हें बहुत उम्मीद थी, लेकिन नियति को कुछ और मंजूर था।
ब्रजभूषण के खिलाफ खोला था मोर्चा
विनेश ने जनवरी 2023 में बजरंग पूनिया और साक्षी मलिक के साथ ब्रजभूषण के खिलाफ मोर्च खोला था। उन्होंने ब्रजभूषण पर महिला पहलवानों से यौन शोषण के आरोप लगाए थे। इस मामले में अदालत ने 21 मई को ब्रजभूषण और विनोद तोमर के खिलाफ आरोप तय कर दिए थे। जिसके बाद विनेश ने इसे नैतिक जीत बताया।
राजनीति से भी जुड़ रहे हैं तार
ब्रजभूषण मामले के बाद उनके साथ कांग्रेस के नेताओं को देखा गया है। पेरिस ओलंपिक से वापसी के दौरान भी कांग्रेस सांसद दिपेंन्द्र हुड्डा इनका स्वागत करने पहुंचे थे। हाल ही में विनेश ने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंन्द्र सिंह हुड्डा से भी मुलाकात की है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि विनेश जल्द ही कांग्रेस ज्वाइन कर सकती हैं।





