नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। लेह में Gen-Z ने बुधवार (24 सितंबर) को केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। छात्रों ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक में समर्थन जमकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान CRPF की गाड़ी को आग भी लगा दी गई। पुलिस और छात्रों के बीच झड़प भी हो गई। वांगचुक बीते कई महीनों से लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने अभी तक इसको लेकर किसी भी तरह का ठोस कदम नहीं उठाया है।
दरअसल सामाजिक और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक लद्दाख में कई दिनों से अनशन पर बैठे थे। वे लेह को छठी अनुसूची में रखने और उसे पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग कर रहे हैं। लेह में छात्रों ने वांगचुक के समर्थन में बुधवार (24 सितंबर) को विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। छात्रों का प्रदर्शन इतना उग्र था कि उनकी पुलिस के साथ झड़प हो गई। पुलिस ने मामले को शांत करवाने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शन और ज्यादा भड़क गया।
इस प्रदर्शन की खास बात यह है कि छात्र इसे पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में कर रहे हैं। वांगचुक लंबे समय से लद्दाख की पहचान और पारिस्थितिकी संरक्षण की आवाज़ उठा रहे हैं। छात्रों का कहना है कि अगर लद्दाख को राज्य का दर्जा नहीं मिला तो यहां की संस्कृति, भाषा और पर्यावरण पर संकट गहराता जाएगा। उनका मानना है कि स्थानीय लोगों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक सुरक्षा मिलनी चाहिए, वरना लद्दाख की अनूठी पहचान खो जाएगी।
झड़प के बाद भड़का माहौल
लेह में हालात उस वक्त बिगड़ गए जब प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हो गईय़ बताया जा रहा है कि नाराज छात्रों ने CRPF की गाड़ी को आग के हवाले कर दिया। इस दौरान पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। हालांकि, इससे माहौल और गर्म हो गया और पूरे इलाके में तनाव फैल गया। चश्मदीदों के मुताबिक, छात्र लगातार लद्दाख को राज्य बनाओ और वादाखिलाफी बंद करो जैसे नारे लगा रहे थे।
प्रशासन ने तैनात किए अतिरिक्त सुरक्षा बल
झड़प के बाद प्रशासन ने स्थिति को संभालने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल और सीआरपीएफ की तैनाती की है। सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं ताकि किसी बड़े हादसे को टाला जा सके। दूसरी ओर, छात्र नेताओं का कहना है कि यह आंदोलन फिलहाल शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा, लेकिन अगर सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया तो यह और बड़ा रूप ले सकता है। लद्दाख के आम नागरिक भी इस आंदोलन से जुड़ने लगे हैं, जिससे यह साफ है कि आने वाले दिनों में केंद्र सरकार पर दबाव और बढ़ सकता है।
स्थानीय संगठनों और नागरिकों का मिला समर्थन
इस विरोध प्रदर्शन को केवल छात्रों का नहीं बल्कि कई स्थानीय संगठनों और नागरिक समूहों का भी समर्थन मिल रहा है। विभिन्न सामाजिक व सांस्कृतिक संगठन मानते हैं कि लद्दाख को राज्य का दर्जा मिलने से यहां की पहचान और संसाधनों पर स्थानीय लोगों का अधिकार सुनिश्चित होगा। इसके अलावा रोज़गार और विकास से जुड़े मुद्दों को भी बेहतर तरीके से सुलझाया जा सकेगा।
राजनीतिक गलियारों में भी गूंजा मामला
लद्दाख में उठी यह मांग अब राष्ट्रीय राजनीति में भी गूंजने लगी है। विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा है कि लद्दाख के लोगों से किए गए वादे पूरे नहीं किए गए। वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि सरकार लोगों की भावनाओं का सम्मान करती है और जल्द ही समाधान निकाला जाएगा। हालांकि, फिलहाल कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया गया है, जिससे स्थानीय लोगों में असंतोष और बढ़ रहा है।




