नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस पार्टी अपनी रणनीति को धार देने में लगी है। राज्य में पार्टी एक बड़ी मीटिंग करने जा रही है। पटना के सदाकत आश्रम में बुधवार को कांग्रेस स्वतंत्रता के बाद पहली बार CWC बैठक करेगी। तेलंगाना जीत के बाद पार्टी को उम्मीद है कि यह रणनीति बिहार में भी असर दिखाएगी। तेलंगाना में 2023 की CWC बैठक ने चुनावी सफलता की राह खोली थी।
कांग्रेस की ऐतिहासिक CWC बैठक पटना में
कांग्रेस की ऐतिहासिक CWC बैठक बुधवार को पटना में होगी, जिसमें मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी समेत 170 नेता शामिल होंगे। बैठक में बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारी, वोटर रोल SIR की अनियमितताएं, पारदर्शिता और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता जैसे अहम मुद्दों पर रणनीति तय होगी।
पार्टी के दिग्गज नेता रहेंगे मौजूद
पटना में होने वाली कांग्रेस की CWC बैठक में सिर्फ बिहार ही नहीं, बल्कि देश की बड़ी चुनौतियाँ भी एजेंडे पर होंगी। महंगाई, बेरोजगारी, महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार और कूटनीतिक विफलताओं पर पार्टी गहन चर्चा करेगी। दिग्गज नेताओं की मौजूदगी से बैठक को ऐतिहासिक माना जा रहा है।
पटना में कांग्रेस की CWC बैठक में राहुल गांधी की मतदाता अधिकार यात्रा की सराहना होगी। 16 दिनों में 1300 किमी का सफर तय कर उन्होंने 25 जिलों में वोट चोरी और वोटर लिस्ट गड़बड़ियों को मुद्दा बनाया। पार्टी अब ‘घर-घर अधिकार अभियान’ से वोटर जागरूकता को नए स्तर पर ले जाएगी।
आजादी के बाद पहली बार पार्टी की इतनी बड़ी मीटिंग
आजादी के बाद पहली बार बिहार में कांग्रेस की इतनी बड़ी बैठक होने जा रही है। पटना का सदाकत आश्रम इस ऐतिहासिक मौके का गवाह बनेगा, जहां 1940 में आखिरी बैठक हुई थी। यही वह जगह है, जहां गांधी, नेहरू और राजेंद्र प्रसाद ने स्वतंत्रता संग्राम की रणनीतियाँ गढ़ी थीं।
पार्टी का लक्ष्य महागठबंधन को सत्ता दिलाना
कांग्रेस CWC बैठक के जरिए बिहार चुनावों में पूरी ताक़त से उतरने की तैयारी कर रही है। पार्टी का लक्ष्य महागठबंधन को सत्ता दिलाना है। चुनाव आयोग अक्टूबर की शुरुआत में विधानसभा चुनावों की घोषणा कर सकता है, ऐसे में यह बैठक रणनीति तय करने में अहम साबित होगी।
बता दें कि, बिहार चुनाव से पहले कांग्रेस ने अब तक सीटों का पत्ता नहीं खोला है, जबकि महागठबंधन की सहयोगी राजद ने साफ कर दिया है कि वह सभी 243 सीटों पर उतरेगी। ऐसे में अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि कांग्रेस कितनी सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान करती है।





