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Thursday, May 28, 2026
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SIR पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद गरमाई राजनीति, BJP बोली- राहुल गांधी और कांग्रेस का एजेंडा एक्सपोज

SIR Verdict: सुप्रीम कोर्ट ने बिहार और पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट SIR प्रक्रिया को वैध ठहराया। फैसले के बाद BJP ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर बड़ा हमला बोला। जानिए कोर्ट ने क्या कहा और क्यों गरमाई सियासत।

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार और पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग द्वारा कराए गए वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को वैध और संवैधानिक करार दिया है। अदालत ने कहा कि इस प्रक्रिया में कोई खामी नहीं है और यह संविधान की कसौटी पर खरी उतरती है। इस फैसले के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर बड़ा हमला बोला है।

BJP का राहुल गांधी पर बड़ा हमला

बीजेपी प्रवक्ता Pradeep Bhandari ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि Rahul Gandhi और कांग्रेस पार्टी एक्सपोज हो गई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया को पूरी तरह वैध और संवैधानिक माना है। बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस शुरू से ही इस प्रक्रिया का विरोध कर रही थी।

“क्या राहुल गांधी माफी मांगेंगे?”

प्रदीप भंडारी ने कहा कि कांग्रेस भारतीय मतदाताओं के बजाय “अवैध घुसपैठियों” के साथ खड़ी दिखाई दी। उन्होंने इसे “राष्ट्रविरोधी कृत्य” बताते हुए सवाल किया कि क्या राहुल गांधी अब भारतीय लोकतंत्र को बदनाम करने के लिए देश से माफी मांगेंगे?

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अपनाई गई प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जा सकते हैं, लेकिन इससे पूरे SIR को अवैधानिक नहीं कहा जा सकता। अदालत ने साफ कहा कि फ्री एंड फेयर इलेक्शन लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग ने दस्तावेजों की विश्वसनीयता के आधार पर निर्णय लिया और इसे मनमाना नहीं कहा जा सकता।

वोटर पर बोझ वाली दलील खारिज

सुनवाई के दौरान यह दलील दी गई थी कि SIR प्रक्रिया में वोटर पर खुद को साबित करने का बोझ डाला गया है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस तर्क से सहमत नहीं है। अदालत ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति अपने पुराने निवास स्थान से कहीं और रह रहा है, तब भी उसका रिकॉर्ड पहले के SIR में मौजूद होगा। इसलिए केवल नाम हटने को नियमों के खिलाफ नहीं माना जा सकता।

चुनाव आयोग नागरिकता तय नहीं करता

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग नागरिकता तय नहीं करता। हालांकि, अगर किसी व्यक्ति के दस्तावेज संदिग्ध लगते हैं तो आयोग उसका मामला केंद्र सरकार को भेज सकता है। अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग को इतने बड़े और विस्तृत कार्य के लिए नियम और प्रक्रिया तय करने का अधिकार है।

फैसले के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। बीजेपी इसे अपनी बड़ी जीत बता रही है, जबकि विपक्ष पहले से ही SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाता रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासत और तेज होने की संभावना है।

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