नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। देशभर में Eid al-Adha यानी बकरीद को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस साल भारत में बकरीद 28 मई 2026 को मनाई जाएगी। मुस्लिम समुदाय के लिए यह त्योहार बेहद खास और पवित्र माना जाता है। इस दिन लोग नमाज अदा करते हैं, कुर्बानी देते हैं और जरूरतमंदों की मदद करते हैं।
हालांकि हर साल कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि आखिर बकरीद पर किन जानवरों की कुर्बानी दी जा सकती है और किन जानवरों की कुर्बानी देना इस्लाम में सही नहीं माना जाता। इस्लामिक शरीयत में इसके लिए साफ नियम बताए गए हैं। जानवर की उम्र, सेहत और स्वस्थ होना बेहद जरूरी माना जाता है।
क्यों मनाई जाती है बकरीद?
इस्लामिक मान्यता के अनुसार Hazrat Ibrahim की अल्लाह ने परीक्षा ली थी। उनसे उनकी सबसे प्यारी चीज कुर्बान करने के लिए कहा गया था। हजरत इब्राहिम के लिए उनके बेटे Hazrat Ismail सबसे प्रिय थे। जब उन्होंने अल्लाह के हुक्म को मानते हुए अपने बेटे की कुर्बानी देने का फैसला किया, तब अल्लाह उनकी नीयत और विश्वास से खुश हुए और हजरत इस्माइल की जगह एक दुम्बा भेज दिया। तभी से बकरीद पर कुर्बानी देने की परंपरा शुरू हुई। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बकरीद का असली संदेश त्याग, इंसानियत और बुराइयों को खत्म करना है।
किन जानवरों की दी जा सकती है कुर्बानी?
इस्लामिक नियमों के मुताबिक कुछ खास जानवरों की ही कुर्बानी दी जा सकती है। इनमें बकरा, बकरी, भेड़, दुम्बा, भैंस, बैल और ऊंट शामिल हैं। धार्मिक जानकारों के मुताबिक जानवर का स्वस्थ और फिट होना जरूरी होता है। बीमार या कमजोर जानवर की कुर्बानी सही नहीं मानी जाती।
किन जानवरों की कुर्बानी नहीं दी जा सकती?
शरीयत के अनुसार ऐसे जानवरों की कुर्बानी नहीं दी जानी चाहिए जो बीमार, कमजोर या शरीर से विकलांग हों। इन जानवरों की कुर्बानी को सही नहीं माना जाता अंधा जानवर, लंगड़ा या घायल जानवर, बहुत ज्यादा कमजोर जानवर, गंभीर बीमारी से पीड़ित जानवर, शरीर में बड़ा दोष वाला जानवर बहुत कम उम्र का जानवर इसके अलावा कई राज्यों में पशु कुर्बानी को लेकर अलग-अलग कानून बने हुए हैं। ऐसे में स्थानीय नियमों का पालन करना भी जरूरी माना जाता है।
कुर्बानी के लिए क्या है उम्र का नियम?
हर जानवर की कुर्बानी के लिए एक तय उम्र जरूरी मानी जाती है। बकरा या बकरी कम से कम 1 साल का होना चाहिए भेड़ या दुम्बा कम से कम 6 महीने का होना जरूरी है भैंस या बैल की उम्र कम से कम 2 साल होनी चाहिए ऊंट कम से कम 5 साल का होना चाहिए उम्र पूरी होने के बाद ही कुर्बानी को सही माना जाता है।
जरूरतमंदों की मदद का भी है संदेश
बकरीद सिर्फ कुर्बानी का त्योहार नहीं माना जाता, बल्कि यह जरूरतमंदों की मदद और भाईचारे का संदेश भी देता है। इस दिन लोग अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और गरीबों के बीच कुर्बानी का मांस बांटते हैं और समाज में आपसी प्रेम और एकता का संदेश देते हैं।





