नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रही ‘Cockroach Janta Party (CJP)’ अब सिर्फ मजाक या मीम्स तक सीमित नहीं रह गई है। पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने NEET पेपर लीक मामले को लेकर ऑनलाइन पिटीशन शुरू कर दी है, जिसके बाद लोगों के मन में बड़ा सवाल उठने लगा है कि क्या इस पार्टी से जुड़े लोग असली चुनाव भी लड़ सकते हैं? भारतीय कानून के अनुसार इसका जवाब “हां” है, लेकिन इसके लिए कुछ जरूरी नियम और शर्तें पूरी करनी होंगी।
पार्टी का सदस्य होना चुनाव लड़ने से नहीं रोकता
भारत के चुनावी नियमों के मुताबिक किसी भी व्यक्ति को सिर्फ इसलिए चुनाव लड़ने से नहीं रोका जा सकता क्योंकि वह किसी सोशल मीडिया ग्रुप या व्यंग्यात्मक संगठन से जुड़ा हुआ है। अगर कोई व्यक्ति भारतीय संविधान और चुनाव आयोग द्वारा तय की गई शर्तों को पूरा करता है, तो वह लोकसभा या विधानसभा चुनाव लड़ सकता है।
चुनाव लड़ने के लिए क्या हैं जरूरी योग्यताएं?
भारत में चुनाव लड़ने के लिए कुछ बुनियादी नियम तय किए गए हैं। उम्मीदवार भारत का नागरिक होना चाहिए लोकसभा और विधानसभा चुनाव के लिए न्यूनतम उम्र 25 साल होनी चाहिए उम्मीदवार का नाम वोटर लिस्ट में होना जरूरी है अगर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का कोई सदस्य इन शर्तों को पूरा करता है, तो वह कानूनी रूप से चुनाव लड़ सकता है।
फिलहाल असली राजनीतिक दल नहीं है CJP
यह समझना जरूरी है कि ‘Cockroach Janta Party’ अभी कोई आधिकारिक राजनीतिक पार्टी नहीं है। इसका अभी तक Election Commission of India में रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है। फिलहाल यह सिर्फ एक डिजिटल और सोशल मीडिया आधारित आंदोलन माना जा रहा है। ऐसी स्थिति में अगर कोई सदस्य चुनाव लड़ना चाहता है, तो उसे या तो किसी रजिस्टर्ड पार्टी से टिकट लेना होगा या निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरना होगा।
नई पार्टी बनाने के लिए क्या करना होगा?
अगर भविष्य में CJP खुद को असली राजनीतिक पार्टी बनाना चाहती है, तो उसे चुनाव आयोग में रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके लिए कुछ जरूरी शर्तें हैं पार्टी गठन के 30 दिनों के भीतर आवेदन देना, पार्टी का लिखित संविधान जमा करना, कम से कम 100 रजिस्टर्ड वोटर्स को सदस्य बनाना, सभी सदस्यों के वैध वोटर आईडी होना जरूरी, अखबारों में देना पड़ता है विज्ञापन नई पार्टी के रजिस्ट्रेशन के दौरान चुनाव आयोग पारदर्शिता के लिए सख्त नियम लागू करता है। पार्टी को अपने गठन की जानकारी दो राष्ट्रीय और दो स्थानीय अखबारों में प्रकाशित करनी होती है। ताकि अगर किसी को पार्टी के नाम या गठन पर आपत्ति हो, तो वह चुनाव आयोग में शिकायत कर सके।
चुनाव चिन्ह पाने के लिए भी है लंबी प्रक्रिया
अगर कोई पार्टी रजिस्टर्ड नहीं होती, तो उसके उम्मीदवारों को चुनाव आयोग की “फ्री सिंबल” सूची में से कोई चिन्ह लेना पड़ता है। जबकि रजिस्टर्ड पार्टियों को चुनाव चिन्ह आवंटन में प्राथमिकता मिलती है। यही वजह है कि नई पार्टियों के लिए पहचान बनाना आसान नहीं होता।
चुनाव के दौरान लागू होती है आचार संहिता
चुनाव की घोषणा होते ही पूरे देश में आचार संहिता लागू हो जाती है। इसके बाद पार्टियां अपना घोषणापत्र जारी करती हैं और जनता के बीच जाकर प्रचार करती हैं। सोशल मीडिया से शुरू हुई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ अगर भविष्य में असली राजनीति में उतरती है, तो उसे भी इन्हीं नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना होगा।





