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Saturday, May 23, 2026
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PM मोदी को झालमुड़ी खिलाने वाले विक्रम को मिली सुरक्षा, जानें क्यों दुकान के बाहर तैनात हुए जवान और कौन उठाएगा इसका पूरा खर्च

Narendra Modi को झालमुड़ी खिलाने वाले विक्रम साव को धमकी मिलने के बाद सुरक्षा दी गई है। जानिए क्यों उनकी दुकान के बाहर Central Reserve Police Force के जवान तैनात किए गए, कौन उठा रहा है सुरक्षा का पूरा खर्च और क्या है पूरा मामला।

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। पश्चिम बंगाल के झारग्राम में उस समय एक साधारण झालमुड़ी विक्रेता अचानक सुर्खियों में आ गया, जब Narendra Modi ने अपने दौरे के दौरान उसकी दुकान पर रुककर झालमुड़ी खाई। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और देखते ही देखते पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया। अब उसी वेंडर विक्रम साव को सुरक्षा मुहैया कराई गई है। बताया जा रहा है कि उन्हें विदेशों से धमकी भरे फोन कॉल मिल रहे थे।

दुकान के बाहर तैनात किए गए CRPF और पुलिस जवान

रिपोर्ट्स के मुताबिक विक्रम साव को पाकिस्तान और बांग्लादेश से जुड़े अंतरराष्ट्रीय नंबरों से धमकियां मिल रही थीं। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने मामले को गंभीरता से लिया। अब उनकी दुकान के बाहर Central Reserve Police Force (CRPF) और स्थानीय पुलिस के जवान तैनात कर दिए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने खतरे का आकलन करने के बाद यह कदम उठाया है।

कौन उठाएगा सुरक्षा का पूरा खर्च?

विक्रम साव को दी गई सुरक्षा का खर्च उन्हें खुद नहीं उठाना होगा। रिपोर्ट्स के अनुसार यह पूरा खर्च भारत सरकार गृह मंत्रालय के बजट के जरिए वहन करेगी। भारत में जब किसी व्यक्ति को सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर खतरा माना जाता है, तब केंद्रीय सुरक्षा उपलब्ध कराई जाती है और उसका खर्च सरकार उठाती है।

विक्रम साव ने क्या बताया?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विक्रम साव का कहना है कि वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें लगातार धमकी भरे फोन और वीडियो कॉल आने लगे। उन्होंने दावा किया कि कई कॉल पाकिस्तान से आए, जबकि बाद में बांग्लादेश से भी इसी तरह के फोन आने लगे। फोन करने वाले कथित तौर पर उन्हें गालियां देते थे और बार-बार पूछते थे कि क्या वह अभी भी जिंदा हैं।

सोशल मीडिया पर बना चर्चा का विषय

एक छोटे सड़क किनारे वेंडर की दुकान के बाहर अचानक सुरक्षा बलों की तैनाती अब सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का बड़ा मुद्दा बन चुकी है। लोग इस घटना को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

कब दी जाती है केंद्रीय सुरक्षा?

भारत में केंद्रीय सुरक्षा तभी दी जाती है जब सुरक्षा एजेंसियां किसी व्यक्ति के लिए संभावित खतरे का आकलन करती हैं। अगर किसी व्यक्ति को राजनीतिक, सामाजिक या सार्वजनिक कारणों से खतरा माना जाता है, तो जरूरत के हिसाब से अस्थायी या स्थायी सुरक्षा दी जा सकती है। इसमें केंद्रीय बलों या स्थानीय पुलिस की तैनाती शामिल होती है। झालमुड़ी बेचने वाले विक्रम साव की जिंदगी एक वायरल वीडियो के बाद पूरी तरह बदल गई है। पहले वह सिर्फ स्थानीय लोगों के बीच जाने जाते थे, लेकिन अब उनका नाम राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। पीएम मोदी के साथ उनकी मुलाकात ने उन्हें अचानक सुर्खियों में ला दिया।

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