नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। इन दिनों सोशल मीडिया पर ‘Cockroach Janta Party’ नाम का व्यंग्यात्मक ऑनलाइन आंदोलन काफी चर्चा में है। यह पेज जस्टिस सूर्यकांत से जुड़ी टिप्पणी को लेकर हुए विवाद के बाद अचानक सुर्खियों में आ गया। हालांकि बाद में जस्टिस सूर्यकांत ने साफ किया कि उनकी बातों को मीडिया के एक हिस्से ने गलत तरीके से पेश किया था। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर यह मुद्दा तेजी से वायरल हो गया। इस पूरे डिजिटल आंदोलन के केंद्र में अभिजीत दीपके नाम के शख्स हैं, जिन्होंने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की शुरुआत की।
अभिजीत दीपके किस समुदाय से आते हैं?
सोशल मीडिया पर अभिजीत दीपके द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, वह दलित समुदाय से आते हैं। उन्होंने ऑनलाइन चर्चाओं के दौरान खुद अपनी जातिगत पहचान का जिक्र किया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी पहचान और पृष्ठभूमि को लेकर काफी चर्चा शुरू हो गई।
कैसे शुरू हुई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’?
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को किसी पारंपरिक राजनीतिक दल की तरह चुनाव लड़ने के उद्देश्य से शुरू नहीं किया गया था। यह एक व्यंग्यात्मक और डिजिटल विरोध आंदोलन के रूप में सामने आया। बताया जाता है कि बेरोजगार युवाओं को “कॉकरोच” कहे जाने से जुड़े विवाद के बाद इस अभियान ने जोर पकड़ा। धीरे-धीरे यह आंदोलन मीम्स और सोशल मीडिया पोस्ट्स के जरिए वायरल होने लगा और बड़ी संख्या में युवाओं का समर्थन मिलने लगा।
कुछ ही दिनों में करोड़ों फॉलोअर्स
रिपोर्ट्स के मुताबिक, लॉन्च होने के कुछ ही दिनों में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के इंस्टाग्राम फॉलोअर्स करोड़ों में पहुंच गए। इसके व्यंग्यात्मक नारे, अलग अंदाज और सत्ता विरोधी संदेशों ने खासकर Gen Z यूजर्स को काफी आकर्षित किया। सोशल मीडिया पर इस पेज की लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि इसकी तुलना कई राजनीतिक दलों के ऑनलाइन फॉलोअर्स से होने लगी।
पहले आम आदमी पार्टी से जुड़ने की चर्चा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ शुरू होने से पहले अभिजीत दीपके कथित तौर पर Aam Aadmi Party के सोशल मीडिया विंग से जुड़े हुए थे। हालांकि इस बारे में आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
डिजिटल विरोध का नया तरीका बन रहा आंदोलन
हालांकि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ फिलहाल एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन पहल मानी जा रही है, लेकिन इसके जरिए कई बड़े सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर बहस शुरू हो गई है। इसके समर्थकों का कहना है कि यह युवाओं की नाराजगी और विरोध को दिखाने का एक नया डिजिटल तरीका है। वहीं आलोचक इसे सिर्फ सोशल मीडिया ट्रेंड मान रहे हैं।





