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Friday, May 22, 2026
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Cockroach Janta Party को क्यों नहीं मिलेगा ‘Cockroach’ चुनाव चिन्ह? जानिए चुनाव आयोग का बड़ा नियम

Cockroach Janta Party सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, लेकिन क्या इसे ‘Cockroach’ चुनाव चिन्ह मिल पाएगा? जानिए चुनाव आयोग के नियम, राजनीतिक दल रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया और जानवरों वाले चुनाव चिन्हों पर लगी पाबंदी की पूरी जानकारी।

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। सोशल media पर इन दिनों ‘Cockroach Janta Party (CJP)’ काफी चर्चा में है। इस पार्टी की शुरुआत अभिजीत दिपके नाम के व्यक्ति ने अमेरिका के बोस्टन शहर से की है। अपने मजाकिया और सरकार-विरोधी अंदाज की वजह से यह पार्टी तेजी से वायरल हो गई। इंस्टाग्राम पर इसकी लोकप्रियता इतनी बढ़ गई कि कई बड़ी राजनीतिक पार्टियों को भी पीछे छोड़ने की चर्चा होने लगी। हालांकि, भारत में इसका आधिकारिक X अकाउंट कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया था, लेकिन बाद में नया अकाउंट बना लिया गया।

चुनाव लड़ने के लिए जरूरी है चुनाव आयोग में रजिस्ट्रेशन

अगर यह पार्टी सच में भारत में चुनाव लड़ना चाहती है, तो सबसे पहले इसे Election Commission के पास रजिस्ट्रेशन कराना होगा। भारत में किसी भी राजनीतिक दल को चुनाव लड़ने के लिए लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 29A के तहत पंजीकरण कराना जरूरी होता है। बिना रजिस्ट्रेशन कोई भी संगठन चुनाव चिन्ह या राजनीतिक अधिकार का दावा नहीं कर सकता।

चुनाव चिन्ह कैसे तय करता है चुनाव आयोग?

भारत में चुनाव चिन्ह देने का अधिकार केवल चुनाव आयोग के पास होता है। चुनाव चिन्ह दो तरह के होते हैं आरक्षित चिन्ह (Reserved Symbol) ये बड़े और मान्यता प्राप्त दलों को दिए जाते हैं, जैसे कमल, पंजा या झाड़ू। फ्री सिंबल (Free Symbol) नई पार्टियों और निर्दलीय उम्मीदवारों को दिए जाते हैं। इसमें ताला-चाबी, एयर कंडीशनर, लैपटॉप, शतरंज बोर्ड और CCTV कैमरा जैसे कई चिन्ह शामिल हैं।

क्यों नहीं मिल सकता ‘कॉकरोच’ चुनाव चिन्ह?

रजिस्ट्रेशन के बाद कोई भी पार्टी अपने पसंदीदा तीन चुनाव चिन्ह सुझा सकती है। लेकिन यहां ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के सामने सबसे बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। दरअसल, चुनाव आयोग के 1968 के नियम के अनुसार किसी भी नए चुनाव चिन्ह में जीव-जंतु या पक्षी शामिल नहीं किए जा सकते। चूंकि कॉकरोच एक जीव है, इसलिए आयोग इस मांग को खारिज कर सकता है। हालांकि अंतिम फैसला चुनाव आयोग के विवेक पर निर्भर करेगा।

जानवरों वाले चिन्हों पर क्यों लगा था नियम?

जानवरों को चुनाव चिन्ह बनाने पर सख्ती साल 1991 के बाद बढ़ाई गई थी। पशु अधिकार संगठनों ने शिकायत की थी कि चुनाव प्रचार में असली जानवरों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे उनके साथ दुर्व्यवहार होता है। इसके बाद चुनाव आयोग ने 2012 में प्रचार के दौरान जानवरों के इस्तेमाल पर सख्त नियम लागू कर दिए। यही वजह है कि अब नए पशु-पक्षी वाले चिन्ह लगभग बंद हो चुके हैं। हालांकि हाथी और शेर जैसे पुराने चिन्ह पहले से मौजूद होने के कारण अभी भी इस्तेमाल किए जाते हैं।

मोबाइल फोन वाला सिंबल मिलना भी मुश्किल

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने मोबाइल फोन को भी चुनाव चिन्ह बनाने की इच्छा जताई है। लेकिन चुनाव आयोग की फ्री सिंबल सूची में मोबाइल फोन शामिल ही नहीं है। सूची में लैंडलाइन फोन और मोबाइल चार्जर जैसे चिन्ह तो मौजूद हैं, लेकिन मोबाइल फोन नहीं। ऐसे में इस पार्टी को अपनी पसंद का चुनाव चिन्ह पाने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

सोशल मीडिया पर आसान, असली राजनीति में मुश्किल राह

सोशल मीडिया पर वायरल होना एक बात है, लेकिन भारतीय राजनीति में आधिकारिक तौर पर चुनाव लड़ना पूरी तरह अलग प्रक्रिया है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने इंटरनेट पर लोगों का ध्यान जरूर खींचा है, लेकिन चुनाव आयोग के नियमों के कारण इसके लिए अपनी पसंद का चिन्ह हासिल करना आसान नहीं दिख रहा।

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