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Monday, May 18, 2026
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UGC बिल पर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने PM को लिखा पत्र, उठाया समाज और शिक्षा से जुड़ा मुद्दा

देश में विवादित यूजीसी बिल 2026 को लेकर एक नया मोड़ सामने आया है। जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बिल को तत्काल वापस लेने की मांग की है।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। यूजीसी बिल 2026 के खिलाफ विरोध अब और तेज हो गया है, जिसमें अयोध्या के जगद्गुरु परमहंस आचार्य भी कूद गए हैं। आचार्य ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की है कि या तो यूजीसी के नए नियम वापस लिए जाएँ या फिर उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाए। नए नियमों को लेकर यूपी के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। विरोध कर रहे पक्ष का कहना है कि नियमों में सर्वण छात्रों को पहले ही दोषी मानकर नियम बनाए गए हैं, जिससे शिक्षा संस्थानों में असंतुलन और अन्याय की स्थिति पैदा हो रही है।

UGC बिल 2026 पर नेताओं और सांसदों की प्रतिक्रियाएं

UGC बिल 2026 को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि “हम कानून के तहत ही काम करते हैं,” जबकि बीजेपी के विधायक देवेंद्र प्रताप सिंह ने चेतावनी दी कि इससे समाज में नफरत बढ़ सकती है। RLSP के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने माना कि नियम गड़बड़ियों को ठीक करने के लिए बनाए गए हैं, लेकिन ASP के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद का कहना है कि इस मुद्दे के जरिए बाकी मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है।

NCP की सांसद फौजिया खान ने शिक्षा में ऐसे माहौल को खतरनाक बताया, वहीं बीजेपी के प्रवक्ता हरीश चंद ने कहा कि लोगों के मतभेद पर सरकार विचार करेगी। कांग्रेस के सांसद मणिकम टैगोर ने शिक्षण संस्थानों पर RSS के बढ़ते प्रभाव की चिंता जताई, जबकि BKU के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने चेतावनी दी कि ऐसी चीजें जातिगत दुश्मनी बढ़ा सकती हैं। SP के सांसद रामगोपाल यादव ने साफ किया कि UGC ने कुछ गलत नहीं किया। इस तरह नेताओं और सांसदों की प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट है कि बिल को लेकर समर्थन और विरोध दोनों ही पक्ष जोरशोर से सामने आ रहे हैं।

UGC का नया एक्ट 2026: जानें मुख्य बातें

UGC के नए Equity Regulations 2026 में कई अहम बदलाव किए गए हैं। इसमें जातीय भेदभाव की परिभाषा में SC/ST के अलावा OBC वर्ग को भी शामिल किया गया है, ताकि उच्च शिक्षा संस्थानों में समान अवसर सुनिश्चित किए जा सकें। वहीं, झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर जुर्माना और निलंबन जैसे सख्त प्रावधान हटाए गए हैं, जिससे छात्रों और शिक्षकों को चिंता है कि नियम का दुरुपयोग हो सकता है। हर कॉलेज और विश्वविद्यालय में 24 घंटे हेल्पलाइन और समानता सुनिश्चित करने के लिए Equity Committee का गठन अनिवार्य किया गया है। इन कमेटियों में SC/ST, OBC और महिलाओं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का प्रावधान रखा गया है, ताकि हर वर्ग की शिकायतें सुनी जा सकें और संस्थानों में समावेशी माहौल बन सके।

UGC एक्ट पर सवर्ण छात्रों का विरोध

सवर्ण छात्रों का कहना है कि नया UGC Equity Regulations 2026 उन्हें पहले ही अच्याचारी मानकर बनाया गया है। उनका दावा है कि झूठी या मनगढ़ंत शिकायतों पर कोई सजा नहीं होगी, जिससे सवर्ण छात्रों पर फर्जी आरोप लगने का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने यह भी चिंता जताई कि भेदभाव की परिभाषा सवर्ण छात्रों के खिलाफ बनाई गई है और कॉलेज तथा विश्वविद्यालयों में गठित Equity Committee में सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व अस्पष्ट रखा गया है। इस कारण छात्रों का कहना है कि नियम एकतरफा है और इसका दुरुपयोग किया जा सकता है, जिससे शिक्षा संस्थानों में असंतुलन और भय का माहौल बन सकता है।

देशभर में UGC एक्ट 2026 के खिलाफ विरोध प्रदर्शन

लखनऊ में करणी सेना ने जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया, वहीं गोंडा में बीजेपी विधायक प्रतीक भूषण ने सक्रिय भूमिका निभाई। रायबरेली में भाजपा नेताओं ने सवर्ण सांसदों को चूड़ियां भेजकर विरोध जताया, जबकि सोनभद्र में सवर्ण समाज के लोगों ने जिला मुख्यालय घेर लिया। फर्रुखाबाद में लोग “प्रधानमंत्री गद्दी छोड़ो” के नारे लगा रहे थे और प्रतापगढ़ में “सवर्ण एकता जिंदाबाद” के नारे गूंजे।

वाराणसी में विरोध के दौरान “हमारी भूल, कमल का फूल” के नारे लगे। मेरठ में राजपूत समाज के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया और संभल में विरोधकारियों ने काली पट्टी बांधकर सड़कों पर नारेबाजी की। फर्रुखाबाद के फतेहगढ़ स्टेडियम के बाहर भी सवर्ण समाज के लोगों ने जोरदार प्रदर्शन किया। लखीमपुर में सवर्ण समाज के लोगों ने भाजपा के विरोध में शपथ ली, जबकि दिल्ली में छात्रों ने नए UGC नियमों के खिलाफ प्रदर्शन कर अपना विरोध जताया।

UGC एक्ट 2026 के विरोध में बीजेपी पदाधिकारियों ने दिया इस्तीफा

नए UGC नियमों के खिलाफ बीजेपी के अंदर भी विरोध उभरकर सामने आया है। 11 जिला पदाधिकारियों ने सामूहिक रूप से अपना इस्तीफा दे दिया है। नोएडा में BJYM के जिला उपाध्यक्ष ने इस्तीफा दिया, जबकि रायबरेली में भाजपा किसान मोर्चा के मंडल अध्यक्ष ने पद छोड़ दिया। इगलास (अलीगढ़) में भाजपा सोशल मीडिया प्रभारी ने इस्तीफा देकर विरोध जताया और वाराणसी में BJP बूथ अध्यक्ष ने भी अपना पद छोड़ा। इस तरह कई नेताओं और पदाधिकारियों के इस्तीफों ने स्पष्ट कर दिया है कि UGC एक्ट 2026 को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है।

नए UGC नियम क्यों बने?

नए UGC Equity Regulations 2026 बनाने की प्रक्रिया कई वर्षों से चल रही थी। पुराने नियम 17 दिसंबर 2012 से लागू थे, लेकिन 2016 में छात्र रोहित वेमुला ने जातीय उत्पीड़न के चलते आत्महत्या की, और मई 2019 में एक मेडिकल छात्रा ने भी इसी कारण से अपनी जान गंवाई। इन घटनाओं के बाद 29 अगस्त 2019 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई, जिसमें जातीय भेदभाव पर सख्त नियम बनाने की मांग की गई। जनवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने UGC को निर्देश दिए और फरवरी 2025 में नए नियमों का ड्राफ्ट जारी किया गया। ड्राफ्ट की समीक्षा संसदीय समिति ने की, जिसकी अध्यक्षता कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने की। प्रारंभिक ड्राफ्ट में OBC वर्ग शामिल नहीं था और झूठी शिकायत करने पर सजा का प्रावधान रखा गया था। बाद में समिति ने OBC को शामिल किया और झूठी शिकायत पर सजा का प्रावधान हटा दिया, जिससे नए नियम तैयार हुए।

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