नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क। ब्रज की पवित्र भूमि पर होली का रंगोत्सव 2026 में भी अपनी पुरानी भव्यता के साथ शुरू हो चुका है। 23 जनवरी 2026 यानी बसंत पंचमी से ब्रज में 40 दिनों तक चलने वाला होली उत्सव शुरू हो गया है। यह रंगोत्सव वृंदावन, बरसाना, नंदगांव, गोकुल और मथुरा में अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है और इसे भक्तिमय परंपराओं, लोकगीतों और सांस्कृतिक विरासत का संगम माना जाता है।
ब्रज की होली राधा-कृष्ण की लीलाओं से जुड़ी है
ब्रज की होली राधा-कृष्ण की लीलाओं से जुड़ी है और यहां के मंदिरों से लेकर गलियों तक हर जगह होली की रंगीन धूम देखने को मिलती है। इस साल भी ब्रज होली की रौनक देखते ही बनती है, क्योंकि यहां लट्ठमार होली, लड्डू मार होली, फूलों वाली होली जैसे अनोखे उत्सव होते हैं, जो सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा हैं।
ब्रज होली 2026 की तारीखें और मुख्य कार्यक्रम
23 जनवरी 2026, शुक्रवार बसंत पंचमी (होली की शुरुआत) बांके बिहारी जी मंदिर और सभी ब्रज मंदिर
24 फरवरी 2026, मंगलवार लड्डू मार होली (फाग निमंत्रण) श्री जी मंदिर, बरसाना
25 फरवरी 2026 बुधवार लठमार होली रंगिली गली, बरसाना
26 फरवरी 2026 गुरुवार लठमार होली नंद भवन, नंदगांव
27 फरवरी 2026 शुक्रवार रंगभरनी एकादशी/फूलों वाली होली बांकेबिहारी मंदिर, वृंदावन
1 मार्च 2026 रविवार छड़िमर होली गोकुल
2 मार्च 2026 सोमवार रमन रेती होली / विधवा होली गोकुल और वृंदावन
3 मार्च 2026 मंगलवार होलिका दहन द्वारकाधीश मंदिर, मथुरा और अन्य मंदिर
4 मार्च 2026 बुधवार धुलंडी मथुरा, वृंदावन, बरसाना, नंदगांव और गोकुल
5 मार्च 2026 गुरुवार दाऊजी का हुरंगा मथुरा में दाऊ जी मंदिर
ब्रज होली का महत्व और खासियत
ब्रज की होली 40 दिनों तक चलने वाली सबसे लंबी और भक्ति-प्रधान होली मानी जाती है। यह उत्सव नई शुरुआत, भक्ति और खुशी का प्रतीक है। ब्रज में होली की एक खास रस्म है मंदिर के अंदर होली का डंडा लगाना, जो रंगोत्सव की शुरुआत का संकेत होता है।
रंगोत्सव के दौरान भक्त राधा रानी और भगवान कृष्ण को ताजे फूलों से बने रंग और गुलाल अर्पित करते हैं। ब्रज के मंदिरों में फूलों की होली, लट्ठमार होली और लड्डू मार होली का भव्य आयोजन होता है, जो सदियों पुरानी परंपरा से जुड़ा है।
क्यों खास है ब्रज की होली?
एक दिन की होली के बजाय ब्रज होली 40 दिनों तक चलती है, जिसमें भक्ति, लोकगीत और सांस्कृतिक विरासत का मिलाजुला त्योहार देखने को मिलता है। हर रस्म राधा और कृष्ण के बीच दिव्य मिलन को दर्शाती है, जिससे भक्तों को पवित्र परंपराओं का अनुभव मिलता है। वृंदावन के मंदिरों से लेकर बरसाना की गलियों और नंदगांव के आंगनों तक, ब्रज होली 2026 रंग, भक्ति और सांस्कृतिक विरासत की यात्रा का अनुभव कराने का वादा करती है।




