नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। अमेरिका और कनाडा के बीच बढ़ते व्यापार तनाव का असर अब रोजमर्रा की चीजों पर भी दिखने लगा है। अमेरिका द्वारा कनाडा पर 25% टैरिफ लगाने के बाद कनाडा ने भी पलटवार किया है। इसके जवाब में कनाडा के कई प्रांतों ने अपने बाजारों और दुकानों से अमेरिकी शराब को हटाने का फैसला किया है।
कई प्रांतों हटाई अमेरिकी शराब
ब्रिटिश कोलंबिया, ओंटारियो, क्यूबेक और नोवा स्कोटिया जैसे प्रमुख प्रांतों ने अमेरिकी शराब की बिक्री पर रोक लगा दी है। ओंटारियो के प्रीमियर डग फोर्ड ने इस फैसले को अमेरिका के लिए बड़ा झटका बताया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी शराब पर यह बैन ट्रंप प्रशासन के गलत फैसले का जवाब है। ओंटारियो में शराब बेचने वाली सरकारी संस्था LCBO ने अपनी वेबसाइट पर नोटिस जारी कर कहा कि अमेरिकी शराब को उनके स्टोर्स से हटा दिया गया है।
दुकानों और बार में भी नहीं मिलेगी अमेरिकी शराब
क्यूबेक सरकार ने भी अपने प्रांत के डिस्ट्रीब्यूटर्स को अमेरिकी शराब की सप्लाई रोकने का आदेश दिया है। इसके अलावा, मैनिटोबा के प्रीमियर वाब किनेव ने भी अपनी दुकानों से अमेरिकी शराब हटाने का फैसला किया है। ब्रिटिश कोलंबिया ने तो सिर्फ रिपब्लिकन शासित अमेरिकी राज्यों से आने वाली शराबों पर बैन लगाया है, जिससे यह साफ हो गया है कि यह केवल व्यापार का नहीं बल्कि राजनीतिक मुद्दा भी बन चुका है।
कनाडा-अमेरिका के बीच बढ़ता टकराव
यह विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 4 मार्च 2025 को कनाडा और मैक्सिको से आयात होने वाले सामानों पर 25% टैरिफ लगाने का ऐलान किया। इसके जवाब में कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भी अमेरिका पर 25% टैरिफ लगा दिया। ट्रूडो ने ट्रंप पर आरोप लगाया कि वह कनाडा की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाकर उसे कमजोर बनाना चाहते हैं। उन्होंने इसे ‘ट्रेड वॉर’ करार दिया और कहा कि कनाडा अपनी आर्थिक संप्रभुता की रक्षा करेगा। इस टकराव का असर सिर्फ शराब तक सीमित नहीं रहेगा। अगर व्यापार युद्ध और बढ़ा तो इससे अन्य उत्पादों की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। दोनों देशों की सरकारें अपने-अपने फैसलों पर अडिग हैं, जिससे हालात और गंभीर हो सकते हैं। अब यह देखना होगा कि अमेरिका-कनाडा के बीच व्यापार युद्ध कब और कैसे खत्म होता है, या फिर यह और गहराता है।





