नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। दिवाली के बाद दिल्ली और मुंबई में बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर बॉलीवुड अभिनेता शाहिद कपूर की पत्नी और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मीरा राजपूत कपूर ने पटाखों के इस्तेमाल पर कड़ा ऐतराज़ जताया है। उन्होंने इस ‘परंपरा’ को सवालों के कटघरे में खड़ा करते हुए कहा है कि बच्चों को पटाखों का ‘अनुभव’ देना कोई बहाना नहीं हो सकता, और पर्यावरण के प्रति ज़िम्मेदारी सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
मीरा राजपूत कपूर इंस्टाग्राम स्टोरी
मीरा ने मंगलवार रात अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक लंबा और भावुक संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने लिखा, हम अब भी पटाखे क्यों फोड़ रहे हैं? ये बिल्कुल भी ठीक नहीं है, चाहे आप इसे बच्चों के लिए एक बार का अनुभव बता रहे हों या सोशल मीडिया के लिए एक ‘फुलझड़ी एस्थेटिक’ बनाना चाह रहे हों।
उन्होंने यह भी लिखा कि, अगर हम इसे सामान्य मान लेंगे, तो हमारे बच्चे भी यही सीखेंगे, और यह चक्र कभी नहीं टूटेगा। ‘Say No To Crackers’ सिर्फ बच्चों की स्कूल प्रोजेक्ट की लाइन नहीं होनी चाहिए, जिसे हम Earth Day पर दिखाएं और दिवाली आते ही भूल जाएं।मीरा का यह बयान ऐसे समय आया है जब मुंबई के बांद्रा इलाके में AQI 300 तक पहुंच गया है, जो “Poor” श्रेणी में आता है। वहीं, दिल्ली की हवा भी लगातार 201 से 300 के बीच AQI के साथ Poor बनी हुई है।
सिर्फ पढ़ाई-लिखाई और अमीरी काफी नहीं है, ज़रूरत है कॉमन सेंस की
मीरा ने समाज की दोहरी मानसिकता पर भी सवाल उठाए और कहा कि पर्यावरण की बातें करना और दिवाली पर पटाखे फोड़ना दोनों साथ नहीं चल सकते।यह परंपरा मैं नहीं निभाना चाहती। दुख इस बात का है कि हमारे पास शिक्षा, जागरूकता और संसाधन होने के बावजूद हम ज़रूरी समझदारी नहीं दिखा पा रहे हैं, उन्होंने यह भी साफ किया कि वह अपने बच्चों को पटाखे देखने के लिए कहीं नहीं भेजेंगी।नहीं, मैं अपने बच्चों को नहीं भेजूंगी यह सब देखने, कृपया रुकिए।
सोशल मीडिया पर दिखावे से आगे बढ़ें: मीरा का संदेश
मीरा ने आखिर में यह भी कहा कि AQI की खबरें सिर्फ इंस्टाग्राम स्टोरी की शोभा नहीं हैं, बल्कि वही हवा हमारे बच्चे सांस के रूप में अंदर ले रहे हैं। उन्होंने सभी से अपील की कि परंपरा और उत्सव के नाम पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाना अब बंद होना चाहिए।
दिवाली के बाद हर साल देश के कई शहरों में वायु गुणवत्ता बेहद खराब हो जाती है। सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी कई बार पटाखों पर रोक लगा चुके हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर सीमित दिखाई देता है। सेलेब्रिटीज़ की ऐसी पहलें उम्मीद जगा सकती हैं कि शायद समाज में धीरे-धीरे बदलाव आए।





