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Tuesday, March 10, 2026
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इस धनतेरस पर सोने में निवेश से पहले जाने ये अहम बातें, ETF, ज्वैलरी या डिजिटल गोल्ड किसमें होगा फायदा ?

भारत में सोने को लोग एक सुरक्षित निवेश विकल्‍प के रूप में मानते हैं। इस धनतेरस के मौके पर निवेश करने से पहले यह जान लें कि सोने के किस रूप में निवेश करने पर ज्यादा फायदा है।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । धनतेरस और दिवाली के मौके पर भारत में सोना खरीदना एक परंपरा ही नहीं, बल्कि एक सुरक्षित निवेश का विकल्प भी माना जाता है। लेकिन अब सोने की खरीद सिर्फ ज्वैलरी तक सीमित नहीं रह गई है। मार्केट में Gold ETF, डिजिटल गोल्ड, Sovereign Gold Bond (SGB) जैसे कई आधुनिक विकल्प मौजूद हैं। सवाल यह है कि इन सभी विकल्पों में निवेश करते समय आपको कहां कम टैक्स देना होगा और कौन-सा विकल्प सबसे ज्यादा फायदे का सौदा साबित हो सकता है? आइए जानते हैं किस गोल्ड इनवेस्टमेंट में निवेश करें। 

सोना : भरोसेमंद निवेश का प्रतीक

भारतीयों के निवेश पोर्टफोलियो में सोना सदियों से एक अहम स्थान रखता आया है। जहां शेयर बाजार उतार-चढ़ाव से प्रभावित होता है और मुद्रास्फीति से नकदी की कीमत घटती है, वहीं सोना अपनी चमक बरकरार रखता है। मंदी, युद्ध या रुपये की गिरावट जैसे संकटों में भी यह ‘सेफ हैवेन एसेट’ साबित हुआ है, जिसने परिवारों की संपत्ति की रक्षा की है। यह भले ही ब्याज नहीं देता, लेकिन कठिन समय में आर्थिक सुरक्षा की गारंटी बन जाता है। इसीलिए कहा जाता है कि सोना सिर्फ धातु नहीं, आपकी वेल्थ का इंश्योरेंस है।

1. फिजिकल गोल्ड (ज्वैलरी, सिक्के, बार्स)

आज गोल्ड में निवेश करने के कई आधुनिक तरीके मौजूद हैं, और हर विकल्प पर टैक्स का नियम अलग होता है। सबसे पारंपरिक तरीका फिजिकल गोल्ड में निवेश करना है, जिसमें लोग ज्वैलरी, सिक्के या सोने की बार्स खरीदते हैं। इसकी खरीद पर 3% GST लगता है, और अगर मेकिंग चार्ज अलग से बिल किया गया है तो उस पर 5% GST देना पड़ता है।

अगर यह सोना तीन साल के भीतर बेच दिया जाए तो उससे होने वाला मुनाफा शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (STCG) माना जाएगा और वह व्यक्ति की इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्सेबल होगा। तीन साल से ज्यादा समय बाद बेचा गया सोना लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) के दायरे में आता है, जिस पर 2024 से लागू नए नियम के मुताबिक 12.5% टैक्स देना होगा (बिना इंडेक्सेशन के)। हालांकि ITR में हर गहने का जिक्र जरूरी नहीं है, लेकिन अगर किसी की सालाना आय 50 लाख रुपये से ज्यादा है तो उसे अपनी बड़ी संपत्तियों में गोल्ड की जानकारी देना अनिवार्य होता है।

2. डिजिटल गोल्ड 

डिजिटल गोल्ड अब PhonePe, Google Pay और Paytm जैसे फिनटेक प्लेटफॉर्म्स पर आसानी से उपलब्ध है। इसमें आप सिर्फ 10 रुपये या 0.1 ग्राम से भी निवेश शुरू कर सकते हैं, जिससे यह छोटे निवेशकों के लिए एक आसान और सुरक्षित विकल्प बन गया है। इसमें फिजिकल गोल्ड जैसी सुरक्षा चिंता नहीं होती, क्योंकि चोरी का डर नहीं होता। 

टैक्स की बात करें तो डिजिटल गोल्ड को फिजिकल गोल्ड के समान ही माना जाता है। इसे बेचने पर अगर होल्डिंग पीरियड तीन साल से कम है, तो उससे होने वाला मुनाफा शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (STCG) होगा, जो इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्सेबल है। अगर इसे तीन साल बाद बेचा जाए, तो लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) के तहत 12.5% टैक्स देना होता है। खरीद के समय 3% GST भी लागू होता है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि डिजिटल गोल्ड को न तो RBI और न ही SEBI रेगुलेट करती है, इसलिए निवेश से पहले पूरी सावधानी बरतना जरूरी है।

3. गोल्ड ETF में निवेश

गोल्ड ETF यानी एक्सचेंज ट्रेडेड फंड, स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड ऐसे फंड होते हैं जो फिजिकल गोल्ड में निवेश करते हैं। इसमें निवेश करने के लिए डिमैट अकाउंट जरूरी होता है। ETF की सबसे बड़ी खासियत है इसकी लिक्विडिटी, यानी जरूरत पड़ने पर आप इसे आसानी से बेच सकते हैं। इसमें चोरी का खतरा नहीं होता और न ही मेकिंग चार्ज देना पड़ता है।

टैक्स की बात करें तो ETF बेचने पर अगर उसे 12 महीने से पहले बेचा गया है, तो उससे होने वाला मुनाफा शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (STCG) होगा, जिस पर आपकी टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा। वहीं, 12 महीने के बाद बेचने पर यह लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) माना जाएगा, जिस पर 12.5% टैक्स देना होगा। ETF में सोना सीधे नहीं खरीदा जाता, इसलिए इस पर कोई GST नहीं लगता है।

4. गोल्ड म्यूचुअल फंड/फंड ऑफ फंड्स (FoF) 

अगर आपके पास डिमैट अकाउंट नहीं है, तो भी आप गोल्ड में निवेश कर सकते हैं गोल्ड म्यूचुअल फंड या फंड ऑफ फंड्स (FoF) के जरिए। ये फंड सीधे गोल्ड नहीं, बल्कि गोल्ड ETF में निवेश करते हैं, इसलिए इसे अप्रत्यक्ष निवेश विकल्प कहा जाता है। टैक्स के लिहाज़ से इसमें भी वही नियम लागू होते हैं जो ETF पर होते हैं। यानी, अगर आपने निवेश 12 महीने के भीतर रिडीम किया, तो मुनाफे पर शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (STCG) लगेगा और यह आपकी इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्सेबल होगा। वहीं, 12 महीने बाद बेचने पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) के रूप में 12.5% टैक्स देना होता है। इस फॉर्मेट में भी कोई मेकिंग चार्ज या GST नहीं लगता, जिससे यह एक किफायती और सुविधाजनक विकल्प बन जाता है।

गोल्ड बेचने पर कितना टैक्स देना होता है? 

मान लीजिए आपने 2022 में 2 लाख रुपये का सोना खरीदा और 2025 में उसे 2.5 लाख रुपये में बेच दिया। इस स्थिति में आपको 50,000 रुपये का मुनाफा हुआ। अब टैक्स का नियम यह देखता है कि आपने सोना कितने समय तक होल्ड किया। अगर यह अवधि 3 साल से कम है, तो यह मुनाफा शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (STCG) माना जाएगा और 50,000 रुपये आपकी टैक्सेबल इनकम में जुड़ जाएगा। इस पर आपको अपनी इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना होगा। वहीं, अगर होल्डिंग पीरियड 3 साल से ज्यादा है, तो यह मुनाफा लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) में आएगा और उस 50,000 रुपये पर आपको 12.5% LTCG टैक्स देना होगा।

इनहेरिटेड गोल्ड पर टैक्स नियम

अगर आपको सोना विरासत (इनहेरिटेड) में या गिफ्ट के रूप में मिला है, तो उस समय कोई टैक्स नहीं लगता। टैक्स तब लागू होता है जब आप इसे बेचते हैं, और इस स्थिति में मूल मालिक का होल्डिंग पीरियड भी माना जाएगा। उदाहरण के तौर पर, अगर आपकी दादी ने 1990 में सोना खरीदा था और आपने उसे 2025 में बेचा, तो यह लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन माना जाएगा और उस पर 12.5% टैक्स देना होगा।

कितना सोना रख सकते हैं आप? 

भारत में सोना रखने की सीमा होल्डर के आधार पर अलग-अलग होती है। शादीशुदा महिलाओं के लिए यह सीमा 500 ग्राम है, जिसका अक्टूबर 2025 में अनुमानित मूल्य लगभग 56.45 लाख रुपये है। अविवाहित महिलाओं के लिए यह सीमा 250 ग्राम रखी गई है, जिसका बाजार मूल्य करीब 28.22 लाख रुपये है। वहीं शादीशुदा पुरुषों के लिए सोना रखने की अनुमत सीमा 100 ग्राम है, जिसका मूल्य 11.29 लाख रुपये के आसपास है।

आयकर विभाग के नियमों के अनुसार, तलाशी के दौरान बिना बिल के भी इस निश्चित मात्रा तक सोने पर सवाल नहीं किया जाता। ध्यान रखें, ये केवल दिशा-निर्देश हैं, सीमा नहीं। अगर आपके पास आपके सोने का स्रोत प्रमाणित है, जैसे बिल, गिफ्ट डीड या विरासत (इनहेरिटेंस) के दस्तावेज तो विभाग द्वारा कोई समस्या नहीं होती।

धनतेरस पर सोच-समझकर करें निवेश

सोना सिर्फ गहना नहीं, बल्कि आपकी वित्तीय स्थिरता का अहम हिस्सा है। यदि आप शॉर्ट टर्म निवेश की योजना बना रहे हैं, तो गोल्ड ETF या डिजिटल गोल्ड आपके लिए बेहतर विकल्प हैं। वहीं, लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं तो Sovereign Gold Bond सबसे समझदारी भरा विकल्प साबित होता है, क्योंकि इसमें ब्याज भी मिलता है और टैक्स में भी राहत मिलती है। इस धनतेरस, सोना खरीदें सिर्फ चमकाने के लिए नहीं, एक सुरक्षित और मजबूत भविष्य बनाने के लिए लेना सही होगा।

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