नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। शीतला सप्तमी का व्रत हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। यह व्रत माता शीतला को समर्पित होता है, जिन्हें रोगों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। खासतौर पर चेचक और अन्य संक्रामक रोगों से बचाव के लिए माता शीतला की पूजा की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है।चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि देवी मां शीतला को समर्पित है। इससे एक दिन पहले शीतला सप्तमी मनाई जाती है।
इस साल कब मनाया जाएगा
शीतला सप्तमी के दिन की पूजा वर्ष 2026 में शीतला सप्तमी का व्रत 10 मार्च, मंगलवार को रखा जाएगा कई स्थानों पर इसे बसोड़ा या बासोड़ा के नाम से भी जाना जाता है।पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि की शुरुआत 09 मार्च को देर रात 11 बजकर 27 मिनट पर शुरू होगी और 11 मार्च को देर रात 01 बजकर 54 मिनट पर समाप्त होगी। इस प्रकार यानी उदया तिथि से 10 मार्च को शीतला सप्तमी मनाई जाएगी। शीतला सप्तमी पर पूजा के लिए शुभ समय 10 मार्च को सुबह 06 बजकर 24 मिनट से लेकर शाम 06 बजकर 26 मिनट तक है। इस दौरान साधक देवी मां शीतला की पूजा कर सकते हैं। वहीं, बुधवार 11 मार्च को बसोड़ा मनाया जाएगा।
शीतला सप्तमी का महत्त्व
शीतला सप्तमी के दिन की सबसे खास परंपरा यह है कि इस दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता। सप्तमी से एक दिन पहले यानी षष्ठी तिथि को भोजन बनाकर रख लिया जाता है और अगले दिन बासी भोजन का भोग माता शीतला को अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि माता शीतला को ठंडा भोजन प्रिय है, इसलिए इस दिन गरम भोजन नहीं बनाया जाता।
पूजा विधि
शीतला सप्तमी के दिन आपको इस प्रकार पूजा अर्चन करना चाहिए। आज के दिन आप सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद माता शीतला की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं। उन्हें ठंडा भोजन, दही, राबड़ी, पूरी, गुड़ और चने आदि का भोग लगाएं। शीतला माता की कथा सुनना या पढ़ना भी शुभ माना जाता है।
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