नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। 6 दिसंबर की सुबह देश के हवाई यात्रियों के लिए कुछ राहत लेकर आई, जब इंडिगो (IndiGo) ने अपनी सेवाएँ ज्यादातर एयरपोर्ट्स से आंशिक रूप से बहाल कर दीं। हालांकि, एयरलाइन के अनुसार, ऑपरेशन को पूरी तरह सामान्य होने में अभी समय लगेगा और उम्मीद है कि शेड्यूल 10 से 15 दिसंबर के बीच स्थिर हो पाएगा। इस बीच, इंडिगो की कई उड़ानें रद्द होने से यात्रियों की मुश्किलें बनी हुई हैं, जिसके चलते अन्य एयरलाइंस, रेलवे और सरकार राहत देने के लिए कदम उठा रहे हैं।
प्रमुख एयरपोर्ट्स पर रद्दीकरण की स्थिति
इंडिगो के तकनीकी संकट का असर देश के कई प्रमुख हवाई अड्डों पर जारी हैयहाँ सबसे अधिक असर देखने को मिला, जहाँ कुल 48 इंडिगो उड़ानें रद्द की गईं। इनमें 28 प्रस्थान और 20 आगमन शामिल थे।चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर आज दस उड़ानें रद्द रहीं, जिससे स्थानीय यात्रियों को भारी परेशानी हुई।कुल 26 उड़ानों (घरेलू और अंतरराष्ट्रीय) में से छह घरेलू उड़ानें रद्द कर दी गईं, जिनमें तीन आगमन और तीन प्रस्थान शामिल हैं।
यात्रियों की दिक्कतें बरकरार
उड़ानें शुरू होने के बावजूद यात्रियों की दिक्कतें पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैंकई लोगों को अब भी रिफंड नहीं मिल पाया है, जबकि रीबुकिंग में ऐप और वेबसाइट लगातार धीमे चलने के कारण बार-बार दिक्कत आ रही है।उड़ानों का समय लगातार बदल रहा है, जिससे यात्रियों और एयरपोर्ट दोनों जगह भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
राहत के लिए उठे सरकारी और निजी कदम
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकार और अन्य परिवहन माध्यमों ने यात्रियों को राहत देने के लिए तुरंत कार्रवाई की हैस्पाइसजेट ने नए रूट्स पर अतिरिक्त उड़ानें जोड़ीं और एयर इंडिया ने भी भीड़ वाले मार्गों पर अपनी क्षमता बढ़ाकर फंसे हुए यात्रियों को वैकल्पिक उड़ानें उपलब्ध कराईं।हवाई सेवाओं में गड़बड़ी का सीधा असर रेलवे पर पड़ा। यात्रियों की अचानक बढ़ी भीड़ को संभालने के लिए भारतीय रेलवे ने कई रूट्स पर अतिरिक्त कोच जोड़े और विशेष ट्रेनें चलाकर लंबी दूरी के यात्रियों को बड़ी राहत दी।
DGCA लगातार निगरानी कर रहा है
नागर विमानन मंत्रालय ने 24 घंटे चलने वाला कंट्रोल रूम सक्रिय किया है। DGCA लगातार निगरानी कर रहा है और किरायों में बढ़ोतरी को रोकने के लिए सख्ती बरत रहा है। अगले कुछ दिनों में भी उड़ानों के समय में बदलाव की संभावना है। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे लगातार अपनी उड़ान की स्थिति की जाँच करते रहें और रिफंड/रीबुकिंग के लिए धैर्य रखें।
इंडिगो के बड़े पैमाने पर उड़ानें रद्द होने के मुख्य कारण
इंडिगो में हालिया दिनों में जो बड़े पैमाने पर उड़ानें रद्द और लेट हुई हैं, उसके पीछे कोई एक कारण नहीं है, बल्कि यह कई कारकों का मिलाजुला परिणाम है। हालांकि, एयरलाइन ने खुद स्वीकार किया है कि मुख्य समस्या पायलट रोस्टर और प्लानिंग से जुड़ी है।
1. नए FDTL नियमों के कारण रोस्टर संकट (मुख्य कारण)
फ्लाइट रद्द होने का सबसे बड़ा कारण पायलटों की कमी (Crew Shortage) और DGCA (नागर विमानन महानिदेशालय) द्वारा लागू किए गए नए नियम हैं:
देश की एविएशन रेगुलेटर DGCA ने पायलटों की थकान को कम करने और सुरक्षा बेहतर करने के लिए 1 नवंबर 2025 से नए FDTL नियम लागू किए हैं।
इन नए नियमों में पायलटों के लिए साप्ताहिक आराम का समय बढ़ाकर 48 घंटे करना और रात में लैंडिंग की संख्या सीमित करना पहले 6, अब प्रति हफ्ता केवल 2 नाइट लैंडिंग शामिल है।
इंडिगो ने स्वीकार किया है कि इन नए नियमों के दूसरे चरण को लागू करने में उनसे “गलत फैसले और प्लानिंग में कमियां” हुईं। एयरलाइन ने समय पर पायलटों की भर्ती और प्रशिक्षण में तेजी नहीं लाई।
नए नियमों के कारण अचानक बड़ी संख्या में पायलट कानूनी तौर पर ड्यूटी के लिए उपलब्ध नहीं हो पाए, जिससे पायलट रोस्टर पूरी तरह बिगड़ गया और स्टाफ की कमी के चलते सैकड़ों उड़ानें रद्द करनी पड़ीं।
2. तकनीकी दिक्कतें और मौसम
पायलट रोस्टर संकट मुख्य कारण है, लेकिन अन्य कारक भी समस्या को बढ़ाते रहे। इंडिगो ने स्वीकार किया है कि हालिया गड़बड़ी में कुछ तकनीकी समस्याओं (Technical Issues) की भी भूमिका रही, जिससे यात्रियों के बोर्डिंग और ऑपरेशनल सिस्टम में देरी हुई।खराब मौसम (विशेषकर उत्तर भारत में सर्दियों के कारण) और एयर ट्रैफिक में बढ़ी भीड़ ने भी शेड्यूल को प्रभावित किया, जिससे देरी और रद्दीकरण का प्रभाव कई गुना बढ़ गया।एयरलाइन ने नियामक (DGCA) को बताया है कि FDTL नॉर्म्स को लागू करने में हुई कमियों के कारण ही इतने बड़े पैमाने पर रुकावटें आईं। इंडिगो ने कहा है कि ऑपरेशंस को पूरी तरह सामान्य और स्थिर होने में 10 फरवरी 2026 तक का समय लग सकता है।




