नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भारत का आईपीओ बाजार 2024 में 11.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर के रिकॉर्ड राजस्व के साथ नई ऊंचाई पर पहुंच गया। यह आंकड़ा 2023 में जुटाई गई 5.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर की राशि का दोगुना है। ग्लोबल डेटा रिपोर्ट के मुताबिक, यह वृद्धि भारत के वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र के विकास और निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है।
2024 में कई प्रमुख IPO लॉन्च हुए
भारत में 2024 में कई प्रमुख आईपीओ लॉन्च हुए जिनमें हुंडई मोटर (3.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर), स्विगी (1.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर), एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी (1.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर), विशाल मेगा मार्ट (0.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर) और बजाज हाउसिंग फाइनेंस (0.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर) शामिल हैं। ये आईपीओ न केवल निवेशकों के लिए फायदेमंद साबित हुए बल्कि बाजार की गति बनाए रखने में भी मदद मिली।
IPO की सफलता के कारण
इस उछाल के लिए कई कारक जिम्मेदार हैं। सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे और प्रमुख क्षेत्र के विकास पर जोर, निजी क्षेत्र में पूंजीगत व्यय में वृद्धि और घरेलू और विदेशी निवेशकों की सक्रिय भागीदारी ने इस बाजार को मजबूत किया है। खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और लिस्टिंग के दिन बेहतर रिटर्न की संभावना ने भी इस बढ़ोतरी को बढ़ावा दिया।
एशिया पैसेफिक रीजन में भारत की स्थिति
एशिया पैसेफिक रीजन में भारत का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा, जहां 200 से अधिक कंपनियां सार्वजनिक क्षेत्र में आईं। इस क्षेत्र में 604 IPO के माध्यम से कुल 33.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाए गए, जिसमें भारत का प्रमुख योगदान रहा। जापान ने 12.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर के साथ 275% की वृद्धि दर्ज की, जबकि मलेशिया ने 1.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर एकत्र किए। इसके विपरीत, चीन में 51% की गिरावट आई, जहां केवल 64 IPO के माध्यम से 5.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाए गए।
2025 के लिए मिल रहे हैं सकारात्मक संकेत
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि 2025 में IPO बाजार मजबूत होगा। खुदरा निवेशकों की सक्रियता, स्थानीय पूंजी प्रवाह और मजबूत पाइपलाइन के कारण भारत में बड़े अवसर होने की उम्मीद है।




