नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बांग्लादेश में न तो सुचारु व्यवस्था ही चल पा रही है और न ही आर्थिक मोर्चे पर कोई अच्छी खबर सामने आ रही है। आर्थिक तौर पर विदेशी मुद्रा की कमी के चलते बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। यूनुस सरकार ने भारतीय कारोबारी गौतम अडानी की कंपनी से खरीदे जाने वाली बिजली की मात्रा में भारी कटौती करने का फैसला लिया है। दरअसल Adani Power से खरीदी जाने वाली बिजली को आधा करने के पीछे अडानी पर लगे आरोपों को भी माना जा रहा है। बांग्लादेश सरकार रिश्वतखोरी के आरोप लगने के बाद अडानी के साथ की गई डील को एनलाइसिस करने की बात कह चुकी है।
Adani Group का बकाया चुकाने में फेल हो रही है बांग्लादेश सरकार
सत्ता पलटने के बाद से ही बांग्लादेश हर मोर्चे पर फेल होता हुआ दिखाई दे रहा है। एक तरफ तो अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों को लेकर बांग्लादेश घिरा हुआ है जबकि इसके अलावा देश विदेशी मुद्रा की कमी से भी जूझ रहा है। साल 2017 में बांग्लादेश की सरकार ने अडानी पावर के साथ डील की थी जिसके तहत बिजली सप्लाई करने के लिए 25 साल का कॉन्ट्रैक्ट हुआ था। हालांकि यूनुस सरकार ने अडानी पावर पर बकाया होने का हवाला देते हुए बिजली सप्लाई को आधा करने का फैसला लिया है। हालांकि पैसे न चुका पाने की वजह से अडानी पावर ने बांग्लादेश को दी जाने वाली बिजली आधी कर दी थी जिसे लेकर बांग्लादेश ने नाराजगी जताई थी, लेकिन अब बांग्लादेश की सरकार की तरफ से भी इस फैसले पर रजामंदी दे दी गई है।
5508 करोड़ रुपये के बोझ तले दबा है बांग्लादेश
बांग्लादेश पावर डेवल्पमेंट बोर्ड की तरफ से बताया गया कि 2017 में किए गए कॉन्ट्रैक्ट के तहत बांग्लादेश को अडानी पावर के 650 मिलियन डॉलर का भुगतान करना है जो कि इंडियन करेंसी में 5,508 करोड़ रुपये है। हालांकि औसत से कम भुगतान करने की वजह से बांग्लादेश की सरकार करीब 900 मिलियन डॉलर के कर्ज तले दब गई है।




