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Saturday, March 21, 2026
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इराक का वो प्रस्तावित कानून… जिसके लागू होते ही लड़कियों की शादी की उम्र हो जाएगी 9 साल

इराक में लड़कियों की शादी की कानूनी उम्र को घटना की कोशिश की जा रही है। इराक में लड़कियों की कानूनी उम्र फिलहाल 18 साल है।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। पूरी दुनिया में बाल विवाह को खत्म करने की कोशिश की जा रही है। इसको लेकर विभिन्न देश तरह-तरह के कानून बना रहे हैं, लेकिन इराक बाल विवाह को वैध बनाने जा रहा है। इराक में लड़कियों की शादी की कानूनी उम्र को घटना की कोशिश की जा रही है। इराक में लड़कियों की कानूनी उम्र फिलहाल 18 साल है। जिसे घटाकर 9 साल किए जाने की योजना पर काम किया जा रहा है।

शिया इस्लामिस्ट कट्टरपंथी पार्टियां दे रही कानूनी संशोधन पर जोर

शिया इस्लामिस्ट पार्टियां संसद में कानून में संशोधन पर जोर दे रही हैं। इस संशोधन के जरिये इराक लड़कियों की शादी 9 साल की उम्र में करने की अनुमति देगा। रविवार को संसद के पटल पर ये प्रस्तावित संशोधन रखा गया। जिसके बाद से इसके खिलाफ बाल अधिकार संगठनों व कार्यकर्ताओं में नराजगी है।

1959 में बनाया गया था ये कानून

वेबसाइट फर्स्ट पोस्ट के मुताबिक महिला अधिकार कार्यकर्ता सुहालिया अल असम ने बताया कि 1959 में वकीलों और धार्मिक प्रमुखों के द्वारा पारित इस कानून को पूरे मिडिल ईस्ट में सबसे अच्छे कानूनों में से एक माना जाता है। इस कानून ने महिला व पुरुषों को शादी करने की कानूनी उम्र 18 साल तय की थी। यह कानून पुरुषों को दूसरी पत्नी रखने से मना करता था। 

गैर मुस्लिम महिलाओं को भी देता है अधिकार

सुहालिया अल असम ने बताया कि यह कानून एक मुस्लिम पुरुष को किसी गैर मुस्लिम महिला से बिना शर्त शादी करने की अनुमति देता है। वहीं द नेशनल न्यूज के अनुसार यह कानून महिलाओं के हित में है। इस कानून के जरिये महिलाएं पति को चुनौती देने का हक रखती हैं। 

इस ड्रॉफ्ट बिल में क्या है ?

शिया इस्लामी रूढ़िवादी पार्टियों के द्वारा आगे बढ़ाए गए इस बिल में कहा गया है कि पति-पत्नी को व्यक्तिगत स्थिति के सभी मामलों में शिया या सुन्नी संप्रदाय के बीच किसी एक धर्म का चयन करना होगा। जब पति-पत्नी के बीच किसी बात को लेकर विवाद होता है, तो चाहे जिस भी प्रावधान के तहत दोनों का कांट्रैक्ट हुआ हो। सुनवाई में कांट्रैक्ट को पति के धर्म के अनुसार संपन्न माना जाएगा। जबतक इसके विपरीत सबूत मौजूद नहीं हो। यह बिल न्यायालय के बजाय शिया और सुन्नी बंदोबस्ती के कार्यालयों को विवाह कराने की इजाजत देगा।

इस बिल में बताया गया है कि शिया कोड ‘जाफरी न्याय व्यवस्था पर आधारित होगा’। इस बिल का नाम शियाओं के छठे इमाम जाफर अल सादिक के नाम पर रखा गया है। यह विवाह, तलाक, गोद और विरासत के नियम को बताता है। इस बिल में लड़कियों को 9 साल और लड़कों को 15 साल में शादी की इजाजत दिया गया है।

1959 में बनाया गया था ये कानून

Middle East Eye वेबसाइट के अनुसार 1959 के व्यक्तिगत संशोधन पर विचार किया जा रहा है। यह कानून अब्दुल करीम कासिम सरकार के द्वारा बनाया गया था। अब्दुल करीम कासिम एक आधुनिक विचारों के नेता थे। वो वामपंथी राष्ट्रवादी विचारधारा को मानने वाले थे। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों सहित कई सुधारवादी कार्य करे।

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