नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । भारतीय क्रिकेट के इतिहास में अगर क्लास, निरंतरता और जुनून की बात की जाए, तो विराट कोहली का नाम सबसे पहले आता है। विराट कोहली, यह नाम ही भारतीय क्रिकेट की पहचान बन चुका है। चाहे लक्ष्य का पीछा करना हो या टीम को मजबूत शुरुआत दिलानी हो, कोहली ने हर परिस्थिति में अपने खेल से खुद को साबित किया है। उनकी बल्लेबाजी तकनीक, आत्मविश्वास और आक्रामकता का अद्भुत संगम है। वनडे क्रिकेट में उन्होंने अनगिनत शानदार पारियां खेली हैं, लेकिन कुछ पारियां ऐसी रहीं जिनमें हर रन के साथ उनका जुनून, क्लास और ‘कभी हार न मानने वाला’ रवैया साफ झलकता है। आइए नजर डालते हैं विराट कोहली की टॉप 5 ODI पारियों पर, जिन्होंने क्रिकेट इतिहास में उनकी विरासत को और मजबूत किया।
183 बनाम पाकिस्तान (एशिया कप 2012, ढाका)
यह मुकाबला आज भी हर भारतीय फैन के दिल में ताजा है। एशिया कप 2012 में पाकिस्तान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 330 रन का विशाल लक्ष्य रखा था। जवाब में भारत की शुरुआत लड़खड़ाई, लेकिन तीसरे नंबर पर उतरे विराट कोहली ने मैच की तस्वीर ही बदल दी। सिर्फ 23 साल की उम्र में कोहली ने 148 गेंदों में 183 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली, जिसमें 22 चौके और 2 छक्के शामिल थे। उन्होंने पहले सचिन तेंदुलकर के साथ 133 रनों की साझेदारी की और फिर रोहित शर्मा के साथ मिलकर भारत को शानदार जीत तक पहुंचाया। इस पारी ने साबित किया कि कोहली सिर्फ रन नहीं बनाते, वह मैच को अपने अंदाज में खत्म करना जानते हैं। यही वह पारी थी जिसने उन्हें असली “चेज मास्टर” बना दिया।
166 बनाम श्रीलंका (जनवरी 2023, तिरुवनंतपुरम)
जब क्रिकेट जगत मान चुका था कि विराट कोहली का पुराना जादू अब शायद लौटेगा नहीं, तब उन्होंने तिरुवनंतपुरम में श्रीलंका के खिलाफ अपने बल्ले से जवाब दिया। सिर्फ 110 गेंदों में नाबाद 166 रन बनाकर अपनी जबरदस्त फॉर्म का परिचय दिया। कोहली ने 13 चौके और 8 छक्कों की मदद से मैदान को अपने स्ट्रोक्स से रंग दिया और भारत को 317 रन की रिकॉर्ड जीत दिलाई। यह सिर्फ एक शानदार इनिंग नहीं थी, बल्कि कोहली के करियर का ‘रीबर्थ मोमेंट’ थी। इस पारी ने साबित कर दिया कि फॉर्म भले ही थोड़ा पीछे हट जाए, लेकिन कोहली की फिटनेस, फोकस और क्लास कभी फीकी नहीं पड़ती। वो लौटे नहीं, वो छा गए।
160 बनाम साउथ अफ्रीका (केपटाउन, 2018)
साउथ अफ्रीका की पिचों पर रन बनाना हमेशा से बल्लेबाजों के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं रहा। उछाल, गति और स्विंग हर चुनौती वहां मौजूद रहती है। लेकिन विराट कोहली के लिए चुनौतियां ही प्रेरणा हैं। केपटाउन में खेले गए इस मुकाबले में भारत ने पहले बल्लेबाजी की और कोहली ने 159 गेंदों में नाबाद 160 रन ठोके। उन्होंने एक छोर थामे रखा और बाकी बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका दिया। यह सिर्फ एक शानदार बल्लेबाजी प्रदर्शन नहीं था, यह धैर्य, मानसिक मजबूती और तकनीकी कौशल का बेहतरीन उदाहरण था। साउथ अफ्रीका जैसी मुश्किल परिस्थितियों में ऐसी पारी खेलकर कोहली ने साबित कर दिया कि चाहे माहौल कितना भी कठिन क्यों न हो, वह हर स्थिति में खुद को ढालना जानते हैं।
157 बनाम वेस्टइंडीज (विशाखापट्टनम, 2018)
वेस्टइंडीज के खिलाफ यह मुकाबला हाई-स्कोरिंग जरूर था, लेकिन विराट कोहली की बल्लेबाजी ने मैच को पूरी तरह एकतरफा बना दिया। कोहली ने सिर्फ 129 गेंदों में नाबाद 157 रन ठोके और अपनी बल्लेबाजी में वो क्लासिक कवर ड्राइव्स और टाइमिंग का जादू बिखेर दिया। 13 चौकों और 4 छक्कों से सजी इस पारी में उन्होंने दिखाया कि रन बनाना ही नहीं, बल्कि हर गेंद पर नियंत्रण बनाए रखना क्या होता है। स्ट्राइक रोटेट करने की उनकी क्षमता, दबाव को खत्म करने का तरीका और धैर्य, यह सब इस पारी में बखूबी झलकता है। यह इनिंग सिर्फ रन की नहीं थी, बल्कि कुशलता, संयम और कोहली के परफेक्शन का शानदार नमूना थी।
154 बनाम न्यूज़ीलैंड (मोहाली, 2016)
न्यूज़ीलैंड के खिलाफ यह मुकाबला विराट कोहली की चेज मास्टरी का एक और उदाहरण था। भारत को 286 रन का लक्ष्य मिला था और शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। शुरुआती विकेट जल्दी गिर गए। लेकिन तब मैदान पर उतरे विराट कोहली ने कप्तान एम.एस. धोनी के साथ मिलकर मैच का रुख बदल दिया। कोहली ने सिर्फ 120 गेंदों में नाबाद 154 रन ठोके, और अपने शांत स्वभाव, सटीक शॉट चयन व स्ट्राइक रोटेशन से रन बटोरे। यह पारी दिखाती है कि एक बल्लेबाज सिर्फ ताकतवर हिट्स से नहीं, बल्कि अपनी सोच, धैर्य और आत्मविश्वास से भी मैच जिता सकता है। मोहाली की इस शाम कोहली ने फिर साबित किया कि जब तक वो क्रीज पर हैं, उम्मीद जिंदा है।




