नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। भारतीय क्रिकेट को नई पहचान देने वाले पूर्व कप्तान कपिल देव आज अपना 67वां जन्मदिन मना रहे हैं। उनका जन्म 6 जनवरी 1959 को पंजाब के चंडीगढ़ में हुआ था। कपिल देव का नाम भारतीय क्रिकेट इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा गया है, क्योंकि उन्हीं की कप्तानी में भारत ने 1983 में पहली बार वर्ल्ड कप जीता था।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
कपिल देव का जीवन आसान नहीं रहा। भारत-पाकिस्तान बंटवारे के समय उनके माता-पिता रावलपिंडी से पंजाब आ गए थे। उनके पिता रामलाल निखंज लकड़ी के ठेकेदार थे। सीमित संसाधनों के बावजूद कपिल देव का रुझान बचपन से ही क्रिकेट की ओर रहा। मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने भारतीय टीम में जगह बनाई और फिर इतिहास रच दिया।
1983 वर्ल्ड कप के भारत के लिए ऐतिहासिक पल
साल 1983 का वर्ल्ड कप भारतीय क्रिकेट का टर्निंग पॉइंट माना जाता है। कपिल देव की कप्तानी में भारत ने मजबूत मानी जाने वाली वेस्टइंडीज टीम को हराकर 25 जून 1983 को वर्ल्ड कप ट्रॉफी अपने नाम की। इस जीत ने भारतीय क्रिकेट को नई दिशा दी और देशभर में क्रिकेट को जुनून बना दिया। 1983 वर्ल्ड कप में जिम्बाब्वे के खिलाफ कपिल देव की 175 रनों की नाबाद पारी आज भी याद की जाती है। उस मैच में भारत के शुरुआती 5 विकेट जल्दी गिर गए थे। मुश्किल हालात में मैदान पर उतरे कपिल देव ने सिर्फ 138 गेंदों में 175 रन बनाकर टीम को जीत दिलाई। यह पारी क्रिकेट इतिहास की सबसे यादगार पारियों में गिनी जाती है। कपिल देव न सिर्फ बेहतरीन बल्लेबाज थे, बल्कि घातक तेज गेंदबाज भी रहे। उन्होंने अपने करियर में कई बड़े रिकॉर्ड बनाए। वेस्टइंडीज जैसी मजबूत टीम के खिलाफ अहमदाबाद टेस्ट में उन्होंने एक पारी में 9 विकेट लेकर सभी को चौंका दिया था। वह उस मैच में 10 विकेट लेने से बस एक कदम दूर रह गए थे।
ICC हॉल ऑफ फेम में मिली जगह
कपिल देव के योगदान को देखते हुए उन्हें 11 मार्च 2010 को ICC हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया। यह सम्मान उनके शानदार करियर और भारतीय क्रिकेट के लिए किए गए योगदान का प्रमाण है। कपिल देव की जिंदगी और 1983 वर्ल्ड कप जीत पर आधारित फिल्म ‘83’ भी चर्चा में रही है। इस फिल्म में रणवीर सिंह ने कपिल देव की भूमिका निभाई है। फिल्म 1983 की ऐतिहासिक जीत की कहानी दिखाती है और दर्शकों को उस दौर की याद दिलाती है।




