नई दिल्ली, रफ्तार न्यूज। कश्मीर घाटी के महत्वपूर्ण सीटों में से एक बारामुला में इस बार की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। इंजिनियर राशिद के नाम से मशहूर शेख अब्दुल राशिद ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 2008 में किया। राशिद ने राजनीतिक जीवन की शुरुआत एक निर्माण इंजीनियर की नौकरी छोड़कर की। जम्मू-कश्मीर में एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में हंदवाड़ा के लंगेट निर्वाचन क्षेत्र से विधानसभा चुनाव लड़ने की फैसला किया।
2 बार रह चुके हैं विधायक
57 साल के राशिद दो बार विधायक रह चुके हैं। साल 2008 में इंजीनियर राशिद पहली बार चुनाव लड़े और जीते। शेख अब्दुल राशिद ने दूसरी बार चुनाव 2014 में लड़ा और जीत हासिल की। मगर जब 2019 में राशिद फिर से बारामुल्ला निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा चुनाव लड़े तो उनको 30 हजार वोटों से हार मिली और उनकी जगह मोहम्मद अकबर लोन ने जीत हासिल की।
लगभग 5 साल बाद मिली जमानत
दरअसल, 2019 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने घाटी में अलगावावादी गतिविधियों को अंजाम देने और आतंकी फंडिग से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले के गैरकानूनी गतिविधियों के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था। बता दें कि, शेख अब्दुल राशिद जम्मू-कश्मीर अवामी इत्तेहाद पार्टी (AIP) के संस्थापक हैं। UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) की कई धाराओं के तहत अब्दुल राशिद को गिरफ्तार किया गया था और करीबन 5 सालों तक वो तिहाड़ जेल में बंद रहे। मगर अब जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और Jammu-Kashmir Peoples Conference (JKPC) के प्रमुख सज्जाद गनी लोन जैसे राजनीतिक दिग्गजों के खिलाफ कड़ी चुनावी लड़ाई लड़ने के लिए राशिद को अंतरिम जमानत मिल गई है।
NIA ने कई लोगों के खिलाफ दर्ज किया था केस
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, NIA ने 30 मई 2017 में लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद के साथ कई और दिग्गज नेताओं के खिलाफ IPC की धारा 120 B के तहत आपराधिक साजिश और गैरकानूनी कार्य अधिनियम UPA 1967 की अलग-अलग धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। इन सभी नेताओं पर आतंकवादियों के साथ मिलकर हवाला के लिए जरिए पैसे पाने और एकत्र करने का आरोप था।
राशिद के बेटे और भाई घाटी में कर रहे अभियान की अगुवाई
राशिद के सलाखों के पीछे होने के बावजूद 23 साल के उनके बेटे अबरार और 21 साल के भाई असरार घाटी में अभियान की अगुवाई कर रहे हैं। राशिद के बेटे अबरार ने The Print की रिपोर्ट में कहा था कि वो कोई राजनेता नहीं हैं। वो एक MSC के छात्र हैं। अबरार का कहना है कि उनके पिता ने उनको हमेशा दूर रखा है मगर वो अब जेल में हैं। तो अबरार के पास उनके लिए सड़क पर उतरने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था।
राशिद को जम्मू-कश्मीर में विशेष दर्जे को हटाने के चार दिन बाद ही गिरफ्तार किया
इंजीनियर राशिद को 9 अगस्त , 2019 को जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 और विशेष दर्जे के हटने के चार दिन बाद ही गिरफ्तार किया गया था। राशिद को तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के साथ हिरासत में रखा गया था। NIA की दूसरी पूरक चार्जशीट में यासिन मलिक, शब्बीर शाह, मसरत आलम और आसिया अंद्राबी के साथ राशिद को आरोपियों के लिस्ट में रखा गया था।





