नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। जम्मू-कश्मीर की बारामूला सीट से सांसद इंजीनियर राशिद (engineer rashid) आज जेल से बाहर आ गए। आतंकी फंडिंग मामले में जेल में बंद राशिद को दिल्ली की पटियाल कोर्ट ने 2 अक्टूबर तक के लिए अंतरिम जमानत दी है। Engineer Rashid ने 3 महीने के लिए अंतरिम जमानत मांगी थी। हालांकि उनकी नियमित जमानत याचिका पर अभी भी आदेश लंबित है।
नया कश्मीर के नैरेटिव से लड़ूंगा
वहीं जेल से बाहर आने के बाद इंजीनियर राशिद उर्फ शेख अब्दुल राशिद ने कहा कि मैं जम्मू कश्मीर को लेकर पीएम मोदी के नया कश्मीर नैरेटिव से लड़ूंगा, जो पूरी तरह से नाकाम हो गया है। उन्होंने आगे कहा कि नरेंद्र मोदी ने 5 अगस्त 2019 को जो किया उसे लोगों ने नकार दिया है। मैं अपने लोगों के कल्याण के लिए काम करूंगा।
‘मोदी जी डरो मत और डराओ मत’
PM Modi पर हमला करते हुए Engineer Rashid ने कहा कि मोदी जी हमसे डरो मत और हमे डराओ मत। हम डरने वाले लोग नहीं है। उन्होंने कहा कि मेरी लड़ाई उमर अब्दुल्ला से बड़ी है। उनकी लड़ाई कुर्सी के लिए तो मेरी लड़ाई लोगों के लिए है। मेरे लिए सरकार नहीं कश्मीर मुद्दा है। मैं BJP का शिकार हूं और मैं आखिरी सांस तक पीएम मोदी के विचारधारा के खिलाफ लड़ता रहूंगा। राशिद ने कश्मीर के लोगों को अपील करते हुए कहा कि मैं कश्मीर में अपने लोगों को एकजुट करने आ रहा हूं। उन्हें बांटने के लिए नहीं आ रहा हूं। हम कश्मीर को लेकर शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं। मुझे चुनाव में NDA या INDIA से कोई लेनादेना नहीं है।
कश्मीरी व्यवसायी जहूर वटाली के दौरान पहली बार नाम आया था सामने
पहली बार Engineer Rashid का नाम कश्मीरी व्यवसायी जहूर वटाली की जांच के दौरान मामले में सामने आया था। NIA ने कश्मीर घाटी में आतंकवादी ग्रुपों और अलगाववादियों को कथित रूप से फंडिंग करने के आरोप में राशिद को गिरफ्तार किया था।
इसी केस में यासीन मलिक को मिली थी आजीवन कारावास की सजा
NIA ने जहूर वटाली मामले की जांच के दौरान कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक, हिजबुल मुजाहिदीन के प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन और लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद समेत कई लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। आरोपों में दोषी ठहराए जाने के बाद यासीन मलिक को 2022 में एक ट्रायल कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।





