नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वक्फ बोर्ड की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रयागराज में कुंभ के दौरान वक्फ बोर्ड ने जमीन पर दावा ठोकने की कोशिश की थी। उन्होंने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि यह वक्फ बोर्ड है या “भू-माफिया बोर्ड”?
वक्फ बोर्ड पर योगी का हमला
गुरुवार को प्रयागराज में निषादराज गुहा जयंती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कुछ लोग प्रयागराज जैसी पौराणिक जगह की पहचान नहीं चाहते थे क्योंकि उनके लिए सिर्फ वोट बैंक महत्वपूर्ण था। उन्होंने कहा, “वक्फ के नाम पर प्रयागराज और अन्य शहरों में जमीन कब्जाने की कोशिश की गई थी। महाकुंभ के दौरान वक्फ बोर्ड मनमाने ढंग से बयान दे रहा था कि प्रयागराज में कुंभ की जमीन भी उनकी है। क्या यह वक्फ बोर्ड है या ‘भू-माफिया बोर्ड’?
पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को कहा धन्यवाद
सीएम योगी ने वक्फ बोर्ड पर लगाम लगाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का आभार जताया। उन्होंने कहा, “हमने उत्तर प्रदेश से माफिया का सफाया कर दिया है। हम पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के आभारी हैं कि उन्होंने वक्फ बोर्ड पर नियंत्रण किया और लोकसभा में इस महत्वपूर्ण अधिनियम को पारित करके देशहित में बड़ा कदम उठाया। लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक, 2025 पारित होने के एक दिन बाद इसे राज्यसभा में पेश किया गया। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को राज्यसभा में वक्फ संशोधन विधेयक और मुसलमान वक्फ निरसन विधेयक पर विचार के लिए प्रस्ताव रखा।
वक्फ संपत्तियों का रिकॉर्ड रखने के लिए तकनीक का अधिक उपयोग किया जाएगा
वक्फ संशोधन विधेयक, 2025 का मुख्य उद्देश्य 1995 के अधिनियम में संशोधन कर भारत में वक्फ संपत्तियों के प्रशासन और प्रबंधन में सुधार लाना है। इस विधेयक के तहत वक्फ बोर्डों की कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा। लोकसभा में यह विधेयक 288 मतों से पारित किया गया, जबकि 232 सदस्यों ने इसके खिलाफ मतदान किया। अब यह राज्यसभा में चर्चा के बाद कानून बनने की प्रक्रिया पूरी करेगा। वक्फ बोर्ड को लेकर चल रहे विवाद के बीच योगी आदित्यनाथ का बयान एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। सरकार का कहना है कि यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकने और उनके सुचारू प्रबंधन को सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है। अब देखना यह है कि राज्यसभा में इसे कितनी जल्दी मंजूरी मिलती है।




