नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। हाल ही में जी-20 के अध्यक्ष के रूप में भारत ने अपने मूल मूल्यों से प्रेरित होकर GDP-केंद्रित से मानव-केंद्रित वैश्विक प्रगति की ओर कदम बढ़ाया“वैश्विक शांति में दरार पड़ने, युद्धों के तीव्र होने और शत्रुता के सिद्धांत में कठोर होने के साथ-साथ जलवायु संकट के मंडराते रहने से मानवता संकट में है, जिसकी मुक्ति भारत के प्राचीन ज्ञान को अपनाने में निहित हो सकती है। सद्भाव, सहिष्णुता और सह-अस्तित्व के सहस्राब्दी पुराने सिद्धांत को अपनाकर ही विश्व शांति को प्राप्त करेगा और यह कार्य आज भी भारत प्रमुखता से कर रहा है।” यह कहना है भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का । वे भारत के प्राचीन ज्ञान की ओर ध्यान आकर्षित करनेवाले विषय पर बोल रहे थे ।
सदियों से भारत के मूल मूल्य इसकी पहचान का आधार हैं
गुरुवार को नई दिल्ली में राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय में ‘भारत के मूल मूल्यों, हितों और उद्देश्यों’ पर उपराष्ट्रपति के संबोधन में ये विचार सामने आए हैं। यहां जगदीप धनखड़ ने इस बात पर जोर दिया कि समावेशी विकास, शांति और पर्यावरण का पोषण करते हुए सार्वभौमिक कल्याण भारतीय दर्शन के मूल में है। सदियों से भारत के मूल मूल्य इसकी पहचान का आधार हैं और भारत के सभ्यतागत लोकाचार और सार पर आधारित हैं।वर्तमान समय में वे प्राचीन ज्ञान और आधुनिकता का मिश्रण हैं जिसका उद्देश्य लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना है।
“जो न केवल अपने लिए बल्कि पूरी मानवता के लिए कल्याण चाहता है”
भारत को दुनिया की आध्यात्मिक राजधानी और उत्कृष्टता और दिव्यता का उद्गम स्थल बताते हुए, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत एक ऐसा राष्ट्र है जो न केवल अपने लिए बल्कि पूरी मानवता के लिए कल्याण चाहता है। “हाल ही में जी-20 के अध्यक्ष के रूप में, भारत ने अपने मूल मूल्यों से प्रेरित होकर जीडीपी-केंद्रित से मानव-केंद्रित वैश्विक प्रगति की ओर कदम बढ़ाया, विभाजन पर एकता पर जोर दिया। अफ्रीकी संघ को जी-20 के स्थायी सदस्य के रूप में एकीकृत करना एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी।




