नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। इस बार यह उपराष्ट्रपति चुनाव क्षेत्रीय और राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए बेहद रोचक हो चुका है। क्योंकि, इंडिया गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी. सुदर्शन रेड्डी को अपना उम्मीदवार बनाया है, जो आंध्र प्रदेश के रंगारेड्डी जिले से ताल्लुक रखते हैं। दूसरी ओर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने महाराष्ट्र के राज्यपाल और तमिलनाडु ताल्लुक रखने वाले सीपी राधाकृष्णन को उम्मीदवार घोषित किया है।
दोनों उम्मीदवार दक्षिण भारत से आते हैं। जहां क्षेत्रीय मूल ने इस चुनाव को एक दिलचस्प मोड़ पर ला खड़ा कर दिया है। इससे NDA और इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों के सामने एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। इंडिया गठबंधन की रणनीति ने NDA को मुश्किल में डाल दिया है।
TDP और YSRCP दोनों पार्टियों में सस्पेंस
इंडिया अलॉयंस ने सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार घोषित कर गठबंधन ने आंध्र प्रदेश की सियासत में एक नया समीकरण जोड़ दिया है। आंध्र प्रदेश में सत्ताधारी तेलुगु देशम पार्टी (TDP) और विपक्षी YSR कांग्रेस पार्टी (YSRCP) दोनों के लिए यह फैसला चुनौतीपूर्ण हो चुका है।
TDP के लिए भी बड़ी चुनौती
TDP एनडीए की खास सहयोगी दल है। उसके प्रमुख और सीएम एन. चंद्रबाबू नायडू अब क्षेत्रीय गौरव और गठबंधन की वफादारी के बीच धर्मसंकट खड़ा हो गया है। उपराष्ट्रपति उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी के आंध्र प्रदेश से ताल्लुक रखने की वजह से TDP के लिए फैसला लेना कठिन हो गया है कि वह अपने राज्य के नेता का समर्थन करे।
जगन मोहन रेड्डी ने दिया राधाकृष्णन को समर्थन
हालांकि YSRCP प्रमुख जगन मोहन रेड्डी पहले ही NDA उम्मीदवार राधाकृष्णन को समर्थन देने का ऐलान कर चुके है। लेकिन सुदर्शन रेड्डी के मैदान में उतरने से उनके सामने भी पेंच फंस गया है। आंध्र प्रदेश में YSRCP का मुख्य आधार रेड्डी समुदाय में है। ऐसे में सुदर्शन रेड्डी के नाम ने उनके समर्थकों के बीच क्षेत्रीय भावनाओं को उजागर कर दिया है। जगन मोहन के लिए अब यह निर्णय आसान नहीं होगा कि, वे NDA का साथ दें या अपने राज्य के उम्मीदवार का समर्थन करें।
DMK के लिए तमिल गौरव बड़ा मुद्दा
उधर, NDA की रणनीति भी तमिलनाडु के जातिय और सामाजिक समीकरणों पर टिकी थी, राधाकृष्णन तमिलनाडु के ओबीसी समुदाय से आते है ओर वह एनडीए के बड़े नेता है। उनको उम्मीदवार बनाकर बीजेपी ने DMK को सस्पेंस में डाल दिया था। DMK इंडिया गठबंधन का हिस्सा है। उसके लिए राधाकृष्णन का तमिल मूल एक चुनौती थी, क्योंकि तमिल गौरव उनके लिए बड़ा मुद्दा है। हालांकि, DMK ने सुदर्शन रेड्डी का साथ देने का फैसला किया है, जिससे यह साफ हो गया कि वे गठबंधन धर्म को प्राथमिकता देंगे।
टीडीपी और YSRCP के सांसदों में क्रॉस-वोटिंग की संभावना
चुनावी हिसाब-किताब पर नजर डाले तो NDA के पास लोकसभा और राज्यसभा में 422 सांसदों का समर्थन है, जो जीत के लिए जरूरी 394 वोटों से अधिक है। YSRCP के समर्थन ने उनकी स्थिति को और मजबूत किया था। लेकिन सुदर्शन रेड्डी का नाम सामने आने के बाद आंध्र प्रदेश में क्षेत्रीय भावनाओं को जागी है। जिससे टीडीपी और YSRCP के सांसदों के बीच क्रॉस-वोटिंग की संभावना बढ़ गई है। यह चुनाव न केवल उपराष्ट्रपति पद के लिए है, बल्कि क्षेत्रीय और राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी एक अहम कड़ी साबित होगा।




