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Friday, March 13, 2026
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UK Election 2024: कौन हैं शिवानी राजा? जिसने ब्रिटेन में लेबर पार्टी के किले को किया ध्वस्त

ब्रिटेन के लीसेस्टर ईस्ट संसदीय सीट पर कंजर्वेटिव पार्टी की शिवानी राजा ने जीत दर्ज की है। ये सीट पिछले 37 सालों से लेबर पार्टी के कब्जे में थी। उन्होंने 4 हजार से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की है।

नई दिल्ली/रफ्तार न्यूज। ब्रिटेन के संसदीय चुनाव में पिछले 14 सालों से सत्ता पर काबिज कंजर्वेटिव पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। वहीं इस चुनाव में लेबर पार्टी को ऐतिहासिक जीत मिली है। कंजर्वेटिव पार्टी की हार के बाद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक को इस्तीफा देना पड़ा। इन चुनावों में एक नाम ऐसा भी है जिसकी खूब चर्चा हो रही है। ये नाम है शिवानी राजा का। शिवानी गुजराती मूल की हैं और पेशे से एक व्यवसायी हैं। उन्होंने लीसेस्टर ईस्ट संसदीय सीट पर जीत दर्ज कर इतिहास बना दिया है। दरअसल ये सीट 37 सालों से लेबर पार्टी के कब्जे में थी। जिसपर कंजर्वेटिव पार्टी की उम्मीदवार शिवानी ने जीत दर्ज कर लेबर पार्टी के किले को ध्वस्त कर दिया।

कौन हैं शिवानी राजा?


शिवानी राजा गुजराती मूल की हैं। शिवानी राजा का जन्म लीसेस्टर में हुआ था। उनकी मां राजकोट से यूके चली गईं और उनके पिता भी गुजराती हैं। जो 1970 के दशक में केन्या चले गए थे। शिवानी ने लीसेस्टर में लंदन के पूर्व डिप्टी मेयर और लेबर पार्टी के उम्मीदवार राजेश अग्रवाल को हराया है। लीसेस्टर ईस्ट पर 1987 से लेबर पार्टी का कब्जा था। इस संबंध में राजा ने बताया कि पूर्व सांसद के खिलाफ मतदाताओं में काफी रोष था। इसलिए मतदाताओं ने लीसेस्टर ईस्ट सीट पर उनका जबरदस्त समर्थन किया।

शिवानी राजा ने जीत पर क्या कहा?


शिवानी राजा ने कहा कि पिछले सांसद वास्तव में लीसेस्टर के लोगों के साथ खड़े नहीं हुए थे। इन राजनेताओं ने लोगों का भरोसा खो दिया था। शिवानी ने आगे कहा कि लोग इस बात से भी निराश थे कि पिछले सांसद दंगों के समय लीसेस्टर के लिए खड़े नहीं थे और किसी बात से पहले उन्होंने हिंदुओं को इस दंगे के लिए दोषी ठहरा दिया।

 2022 में लिसेस्टर में हुआ था हिंदू-मुस्लिम दंगा


बता दें कि 28 अगस्त 2022 में लिसेस्टर में हिंदू-मुस्लिम सांप्रदायिक दंगे तब शुरू हुए जब एशिया कप टी-20 मैच में भारत ने पाकिस्तान को हरा दिया था। 6 सितंबर को लिसेस्टर में गुस्साये पाकिस्तानी मुसलमानों ने हिंदू समुदाय को निशाना बनाया था। इस दौरान मुसलमानों ने हिंदू मंदिर से झंडे उतारकर फेंक दिये थे। इसी तरह की घटना 20 सितंबर को बर्मिंघम के स्मेथविक में हुई थी। जिसमें हिंसक मुस्लिमों की भीड़ ने दुर्गा भवन मंदिर के बाहर हिंसक प्रदर्शन किया था। जिसके बाद वहां की मीडिया और नेताओं ने इस घटना के लिए हिंदुओं को जिम्मेदार ठहराया था।

सजायाफ्ता आतंकी ने फैलाई थी अफवाह


हालांकि जांच में पता चला कि लीसेस्टर में हुए टकराव में किसी बड़े दल का हाथ नहीं था। बल्कि दोनों समुदायों के कुछ लोग इकठ्ठा हुए और झड़प हो गई। इन झड़पों को हिंदुत्व ग्रुप्स से जोड़कर गलत तरीके से पेश किया गया। इसके लिए एक इंफ्लूएंसर को दोषी पाया गया। जो तालिबान और ISIS का समर्थक भी रहा है। वो इंफ्लुएंसर एक सजायाफ्ता आतंकी रह चुका है। इस घटना के बाद कई हिंदू उस जगह को छोड़कर दूसरी जगह चले गए थे।

कंजर्वेटिव पार्टी ने 30 भारतीयों को मैदान में उतारा था


इस बार चुनावों में 30 भारतीय मूल के लोगों को कंजर्वेटिव पार्टी ने अपना उम्मीदवार बनाया था। वहीं लेबर पार्टी ने 33 भारतीय-ब्रिटिश लोगों को चुनावी मैदान में उतारा था। इसके अलावा लिबरल डेमोक्रेट्स ने 11, रिफॉर्म यूके ने 13, ग्रीन पार्टी ने 13 व अन्य 7 भारतीय मूल के उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे।


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