नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। देश के कई राज्यों में बाढ़ आया हुआ है ऐसे में जब जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है तब बाढ़ के बाद न सिर्फ गंदगी और संक्रमण फैलता है, बल्कि कई गंभीर बीमारियां भी तेजी से पनपने लगती है बाढ़ के पानी में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस और केमिकल्स व्यक्ति को गंभीर बीमारियों की चपेट में ला सकते हैं. साथ ही, साफ पानी और साफ-सफाई की कमी से संक्रमण तेजी से फैलता है. ऐसे में जरूरी है कि लोग बाढ़ के बाद अपनी सेहत को लेकर सतर्क रहें और किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें। आइए जानते है बाढ़ के बाद किन बीमारियों का खतरा सबसे ज्यादा होता है, इनके लक्षण क्या होते हैं व इससे कैसे बचाव किया जा सकता है।
भारत के कई राज्य हर साल बाढ़ की चपेट में आते है, जैसे, इस समय बिहार, असम, उत्तर प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्य बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुआ है जहां न सिर्फ आम जनजीवन बल्कि संपत्ति, स्वास्थ्य संबंधी भी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है जिससे पानी के भराव से गंदगी, संक्रमित मच्छरों और गंदे पानी के संपर्क में आने से बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। पानी में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस और केमिकल्स व्यक्ति को गंभीर बीमारियों की चपेट में ला सकते हैं। बाढ़ के बाद सबसे ज्यादा मच्छरजनित बीमारियों का खतरा होता है, जैसें, डायरिया, हैजा, टाइफॉइड, हेपेटाइटिस, हेपेटाइटिस-ए, और पीलिया जैसी बीमारियां ज्यादा विशेषरुप से है।
ऐसा अक्सर तब होता है जब बाढ़ के बाद रुके हुए पानी में मच्छरों के पनपने की संभावना बढ़ जाती है, कुछ मामलों में स्किन इंफेक्शन, फंगल इंफेक्शन, और लेप्टोस्पायरोसिस जैंसी बीमारियां भी देखी जाती हैं, जो संक्रमित पानी या मिट्टी के संपर्क में आने से फैलती हैं। बाढ़ के दौरान लोग अक्सर भीग जाते हैं, लंबे समय तक गीले कपड़ों में रहने और सफाई की कमी के कारण फंगल इंफेक्शन भी आम हो जाता है। जिससे सांस संबंधी संक्रमण और आंखों की बीमारियां भी देखने को मिलती हैं।
क्या हैं लक्षण, इलाज और बचाव के तरीके?
आरएमएल मेडिसिन विभाग में डॉ. गिरी के अनुसार, बाढ़ के बाद फैलने वाली बीमारियों के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं, अगर डायरिया या हैजा हो तो बार-बार दस्त, उल्टी, कमजोरी और शरीर में पानी की कमी हो सकती है। टाइफॉइड में बुखार, सिरदर्द, पेट दर्द और भूख न लगना सामान्य लक्षण है, हेपेटाइटिस-ए और पीलिया में त्वचा और आंखों का पीला पड़ना, थकान और मतली हो सकती है। मलेरिया और डेंगू में तेज बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द और मांसपेशियों में खिंचाव होता है। डेंगू में प्लेटलेट्स से तेजी से गिर सकते हैं, जिससे जानलेवा साबित हो सकता है।
इलाज के लिए सबसे पहले डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है, डायरिया और हैजा में ओआरएस और साफ पानी का सेवन, मलेरिया और डेंगू में दवाएं और डॉक्टर की निगरानी हेपेटाइटिस-ए में आराम और लिवर का ख्याल रखना और स्किन इंफेक्शन में एंटीफंगल क्रीम या दवाएं दी जाती है। बचाव के लिए साफ और उबला हुआ पानी पीना चाहिए। खुले खाने से परहेज करना और मच्छरों से बचाव करना बेहद जरूरी है। समय रहते इन लक्षणों को पहचानना और इलाज कराना गंभीर स्थितियों से बचा सकता है।
क्या सावधानियां बरतें?
ऐसे में पानी को उबालकर या फिल्टर किया हुआही पिएं।
भीगे कपड़े तुरंत बदलें, खुद को सूखा रखें।
मच्छरों से बचाव के लिए क्रीम, मच्छरदानी या फुल कपड़े पहनें।
खुले खाने से परहेज करें, सिर्फ ताजा और साफ खाना खाएं।
बच्चों और बुजुर्गों की विशेष देखभाल करें।
अगर कोई भी असामान्य लक्षण दिखे तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करें।
अपने घर और आसपास की सफाई का विशेष ध्यान रखें।
रुके हुए पानी में जैविक तेल या मिट्टी का तेल डालें, ताकि मच्छर न पनपे।




