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Friday, March 13, 2026
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संभल में हुए 1978 के दंगों की दोबारा होगी जांच? योगी सरकार ने पुलिस से रिपोर्ट मांगी है

राज्य सरकार ने संभल में 1978 के दंगों की जांच पर सात दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी है। संभल प्रशासन और पुलिस मामले की जांच करेगी।

नई दिल्‍ली, रफ्तार डेस्‍क । राज्य सरकार ने संभल में 1978 के दंगों की जांच पर सात दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी है। संभल प्रशासन और पुलिस मामले की जांच करेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिसंबर 2024 में विधानसभा सत्र के दौरान संबल दंगे पर बयान दिया था। उत्तर प्रदेश के संभल में एक मंदिर, जो 46 वर्षों से बंद था, हाल ही में फिर से खोल दिया गया है। अब उत्तर प्रदेश सरकार ने 1978 यानी 46 साल पहले संभल में हुए दंगों की रिपोर्ट पुलिस से मांगी है।

40 रस्तोगी परिवार घर छोड़ने को मजबूर

UP CM योगी आदित्यनाथ ने दिसंबर में विधानसभा में कहा था कि 1947 से अब तक संभल में हुए दंगों में 209 हिंदुओं की जान जा चुकी है। 29 मार्च 1978 को संभल में दंगों के दौरान आगजनी की घटनाएं हुईं। इस घटना में कई हिन्दू मारे गये। भय के कारण 40 रस्तोगी परिवार अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गये। अभी भी भागने के गवाह मौजूद हैं। मंदिर में पूजा करने वाला कोई नहीं बचा था। घटना के 46 साल बाद भी अभी तक किसी को सजा नहीं मिली है। प्रशासन और स्थानीय लोगों के सक्रिय प्रयासों से 46 वर्षों से बंद मंदिर के कपाट खोल दिए गए। इसके बाद, अधिकारियों ने संभल दंगों की जांच फिर से शुरू कर दी है।

1978 में सम्भल में दो महीने का लगा था कर्फ्यू 

29 मार्च 1978 को सम्भल में दंगे हुए थे। इस दंगे में शहर में आग लग गई। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए कर्फ्यू लगा दिया था। फिर भी शहर में दोनों समुदायों के बीच स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। ऐसे में कर्फ्यू की अवधि लगातार बढ़ती गई। संभल में दो महीने तक कर्फ्यू लागू रहा।

जल्द ही पूरा शहर आग की चपेट में आ गया 

29 मार्च 1978 को सम्भल में दंगे भड़क उठे। उस समय प्रशासन ने स्थिति पर नियंत्रण पा लिया था। लेकिन शहर में तनाव बना रहा। एक मुस्लिम लीग नेता ने अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के कारण बाजार में दुकानें बंद करानी शुरू कर दी थीं। अन्य समुदायों के व्यापारियों ने इसका विरोध किया। जब लड़ाई छिड़ गई तो नेता के साथी उसे छोड़कर घटनास्थल से भाग गए। इन्हीं साथियों ने अफवाह फैला दी कि नेता की हत्या कर दी गई है। इसके बाद दंगा भड़क गया। दुकानों में लूटपाट, पत्थरबाजी और आगजनी शुरू हो गई। जल्द ही पूरा शहर आग की चपेट में आ गया। विशेषज्ञों का कहना है कि दंगों में कई लोग मारे गए। इस दंगे में करीब 169 मामले दर्ज किये गये। पुलिस ने इस संबंध में तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

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