नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने राजनीतिक रणनीति को फिर से सक्रिय कर दिया है। पार्टी ने अपने पहले टिकट के लिए ब्राह्मण नेता आशीष पांडेय को चुना है। उन्हें जालौन जिले की माधौगढ़ सीट से पार्टी का प्रत्याशी घोषित किया गया है, साथ ही उन्हें इस सीट का प्रभारी भी बनाया गया है। माधौगढ़ BSP का गढ़ माना जाता है और पार्टी ने यहां 2017 के चुनाव में दूसरे स्थान पर रही थी। पार्टी सूत्रों के अनुसार, बीएसपी होली के बाद कानपुर मंडल की अन्य पांच सीटों के प्रभारियों की घोषणा भी करेगी।
”बीएसपी शासन में ब्राह्मणों को सम्मान”
मायावती लगातार ब्राह्मण समाज को साधने की कोशिश कर रही हैं। यूपी में बीएसपी प्रमुख पहले भी इस समुदाय की उपेक्षा पर चिंता जता चुकी हैं और अब उन्होंने पहला टिकट ब्राह्मण नेता को देकर इस बिरादरी को महत्व देने का संदेश दिया है। 7 फरवरी को पार्टी की अहम बैठक के बाद मायावती ने कहा था कि बीजेपी सरकार में सभी वर्ग त्रस्त हैं, लेकिन ब्राह्मण समाज उपेक्षा और असम्मान के खिलाफ सबसे मुखर है। उन्होंने यह भी कहा कि बीएसपी शासन में ब्राह्मणों को सम्मान, पद और सुरक्षा सभी स्तरों पर दिया गया, जो किसी दूसरी पार्टी या सरकार ने नहीं दे पाया।
यह पूरे देश में ब्राह्मण समाज में रोष उत्पन्न कर रहा है
पिछले दिनों रिलीज हुई फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ में कथित रूप से ब्राह्मण समाज का अपमान किए जाने पर मायावती ने नाराजगी जताई और इसकी कड़ी आलोचना की। 6 फरवरी को अपने आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर उन्होंने लिखा कि यह पूरे देश में ब्राह्मण समाज में रोष उत्पन्न कर रहा है और BSP इसे कड़े शब्दों में निंदा करती है।
ब्राह्मण समाज को प्रतिनिधित्व दिया
इससे पहले 15 जनवरी को अपने 70वें जन्मदिन के अवसर पर मायावती ने भी ब्राह्मण बिरादरी के प्रति अपने प्रेम और सम्मान को रेखांकित किया था। उन्होंने बताया कि पार्टी ने हमेशा से ब्राह्मण समाज को उचित प्रतिनिधित्व दिया है और अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं ने उनसे इस बिरादरी की उपेक्षा पर शिकायत भी दर्ज कराई थी। मायावती ने यूपी में बीएसपी शासनकाल का जिक्र करते हुए बताया कि दलित समुदाय के साथ-साथ अन्य समुदायों के लिए भी पार्टी ने कई काम किए।
ब्राह्मण और दलित वोटों का संतुलन
इतिहास गवाह है कि साल 2007 में मायावती ने सामाजिक इंजीनियरिंग के दम पर यूपी में सत्ता में वापसी की थी। वह परंपरागत दलित वोटों के साथ-साथ ब्राह्मण वोटरों को साधने में भी सफल रहीं, जिससे विपक्षी दलों को करारी हार का सामना करना पड़ा। अब 2027 के विधानसभा चुनाव में मायावती उसी फॉर्मूले को दोहराना चाह रही हैं। पार्टी की इस रणनीति का लक्ष्य ब्राह्मण और दलित वोटों का संतुलन बनाए रखते हुए चुनावी सफलता हासिल करना है।
आगामी विधानसभा चुनाव में इसका असर होगा?
BSP की इस रणनीति से साफ हो गया है कि मायावती लगातार अपने पारंपरिक वोट बैंक के साथ-साथ ब्राह्मण बिरादरी को साधकर सत्ता में वापसी के अपने लक्ष्य को मजबूत कर रही हैं। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि ब्राह्मण नेताओं को महत्व देने से पार्टी की पकड़ उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में और मजबूत हो सकती है और आगामी विधानसभा चुनाव में इसका असर निर्णायक साबित हो सकता है।





