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Monday, April 20, 2026
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पश्चिम बंगाल में 77 मुस्लिम जातियों को नहीं म‍िलेगा OBC आरक्षण, SC ने पूछा- किस आधार पर इन्हें दिया आरक्षण

कलकत्ता हाईकोर्ट के द्वारा मुस्लिमों को OBC आरक्षण के रद्द कर देने के फैसले को पश्चिम बंगाल की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। जिसपर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। ममता बनर्जी सरकार के द्वारा पश्चिम बंगाल में 77 मुस्लिम जातियों को आरक्षण देने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने आज पश्चिम बंगाल की सरकार को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने ये नोटिस कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका पर दिया है।

कलकत्ता HC ने बंगाल सरकार के फैसले को रद्द किया था

दरअसल कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार के द्वारा 77 मुस्लिम जातियों को अन्य पिछड़ा वर्ग के रूप में आरक्षण देने के फैसले को रद्द कर दिया था। जिसके बाद 2010 के बाद पश्चिम बंगाल में जारी सभी अन्य पिछड़ा वर्ग प्रमाण पत्र रद्द हो गए। हाईकोर्ट के इस फैसले को पश्चिम बंगाल ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को ये नोटिस जारी किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने ममता सरकार को जारी किया नोटिस

इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने ममता सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जिसमें ये पूछा गया है कि सरकार ने किस आधार पर मुस्लिम जातियों को ये कोटा दिया है। बता दें कि जेबी पारदीवाला और मनोज मिश्रा के साथ चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। जिसमें उन्होंने राज्य से हलफनामा दाखिल करने को कहा है। 

ओबीसी में वर्गीकृत करने के लिए कौन सी अपनाई गई प्रक्रिया- SC

इस दौरान कोर्ट ने बंगाल की सरकार से जवाब मांगते हुए कहा कि इन मुस्लिम जातियों को ओबीसी में वर्गीकृत करने के लिए कौन सी प्रक्रिया अपनाई गई है। इस प्रक्रिया की कोई प्रकृति की जानकारी दें। सरकार बताये कि इन्हें आरक्षण देने के लिए कौन सा सर्वेक्षण किया है।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा था?

कलकत्ता हाईकोर्ट ने मुस्लिमों को ओबीसी आरक्षण देने के संबंध में दिए गए अपने फैसले में कहा था कि राज्य में सेवाओं व पदों पर रिक्तियों में इस तरह का आरक्षण देना अवैध है। हाईकोर्ट ने कहा था कि इन समुदायों को ओबीसी का दर्जा देने के लिए सिर्फ धर्म ही एकमात्र आधार रहा है। अदालत ने ये भी कहा था कि मुसलमानों की 77 जातियों को पिछड़ा घोषित करना मुसलमान समुदाय का अपमान है। इसके बाद हाईकोर्ट ने 2010 के बीच 77 जातियों को दिए गए आरक्षण और 2012 के कानून के आधार पर बनाये गए 37 वर्गों को रद्द कर दिया था।

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