नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। मोदी सरकार वक्फ बोर्ड द्वारा वक्फ अधिनियम का गलत फायदा उठाकर भू-माफिया की तरह काम करने के तरीके के खिलाफ है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मोदी सरकार वक्फ अधिनियम में संशोधन करके वक्फ बोर्ड की असीमित शक्तियों को सीमित करना चाहती है। मोदी सरकार पूर्व की सरकारों द्वारा वक्फ बोर्ड को दी गई इन असीमित शक्तियों को सीमित करना चाहती है। वक्फ बोर्ड पर आरोप है कि इन्होंने व्यक्तिगत संपत्ति, सरकारी संपत्ति, मंदिरों की जमीन से लेकर गुरुद्वारों की जमीन तक में कब्जा किया है। वक्फ बोर्ड, वक्फ अधिनियम में पूर्व की सरकारों द्वारा किए गए संशोधन का गैरकानूनी लाभ उठाकर भू-माफिया की तरह काम कर रहा है। इसी को लेकर मोदी सरकार वक्फ अधिनियम में संशोधन करना चाहती है।
एक गुरुद्वारे की जमीन पर ही कब्जा कर लिया
वक्फ बोर्ड पर कई जमीनों पर भू-माफिया की तरह से काम करके कब्जा करने के आरोप हैं। वक्फ बोर्ड ने वक्फ अधिनियम का गैर कानूनी लाभ उठाकर मंदिरों और गुरुद्वारे को भी नहीं छोड़ा। हरियाणा के यमुनानगर जिले के जठलाना गांव में वक्फ बोर्ड ने वक्फ अधिनियम का गैरकानूनी लाभ उठाकर एक गुरुद्वारे की जमीन पर ही कब्जा कर लिया। जबकि गुरुद्वारे की जमीन किसी भी मुस्लिम बस्ती या मस्जिद से संबंधित नहीं थी। वक्फ बोर्ड के इस गैरकानूनी कदम के बाद स्थानीय निवासियों में भी इस तरह के अधिनियम पर नाराजगी थी।
बोर्ड पर वक्फ अधिनियम का प्रयोग कर कई जमीनों को कब्जा करने के आरोप
वहीं तमिलनाडु में वक्फ बोर्ड ने हाल में ही एक गांव में दावा करके सबको हैरान कर दिया था, इस गांव में एक 1500 साल पुराना मंदिर भी था। लेकिन इसके बावजूद भी वक्फ बोर्ड ने इस तरह का दावा करके सबको चौका दिया था। वक्फ बोर्ड पर वक्फ अधिनियम का प्रयोग कर कई जमीनों को कब्जा करने के आरोप हैं।
जिसको कोर्ट में भी चुनौती नहीं दी जा सकती थी
बता दें कि वर्ष 1991 में बाबरी मस्जिद को गिराने के बाद कांग्रेस की पीवी नरसिंहा राव सरकार ने वर्ष 1995 में वक्फ अधिनियम में संशोधन कर दिया था, जिससे वक्फ बोर्ड को असीमित शक्तियां दे दी गयी। वक्फ बोर्ड को ये शक्तियां जमीनें अधिग्रहित करने के लिए दी गई। जानकारी के अनुसार वर्ष 2013 में कांग्रेस सरकार ने वक्फ अधिनियम में संशोधन कर दिया, जिससे वक्फ बोर्ड को संपति छिनने में किसी तरह की परेशानी न आएं। कांग्रेस सरकार ने संशोधन करके वक्फ बोर्ड को इतनी शक्ति दे दी थी कि जिसको कोर्ट में भी चुनौती नहीं दी जा सकती थी।
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