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Wednesday, March 11, 2026
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दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की अंतरिम जमानत को लेकर आज दोपहर आएगा फैसला, HC पर सबकी नजरें

Arvind Kejriwal: दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने इस मामले के फैसले को सुरक्षित रख दिया था।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। दिल्ली हाईकोर्ट आज 5 अगस्त 2024 को दोपहर 02 : 30 बजे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की CBI द्वारा की गई उनकी गिरफ्तारी वाली याचिका और अंतरिम जमानत याचिका पर फैसला सुनाएगी। बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट ने 29 जुलाई 2024 को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सीबीआई द्वारा गिरफ्तारी वाली याचिका और अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई की थी। हाईकोर्ट में जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने इस मामले के फैसले को सुरक्षित रख दिया था। 

सीबीआई की तरफ से इस मामले की पैरवी वकील डीपी सिंह ने की

सीबीआई की तरफ से इस मामले की पैरवी वकील डीपी सिंह ने की थी। वकील डीपी सिंह ने हाईकोर्ट में कहा कि दिल्ली शराब घोटाला मामले में मुख्य आरोपी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ही हैं। सीबीआई की तरफ से पेश वकील डीपी सिंह ने कहा कि अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बिना इस मामले की जांच नहीं की जा सकती थी। उन्होंने कहा कि हमने इस मामले में एक महीने के अंदर ही चार्जशीट दाखिल कर दी थी। वहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तरफ से वकील अभिषेक मनु सिंघवी और वकील एन हरिहरन ने इसके खिलाफ अपनी दलीलें रखी थी।  

चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह फैसला सुनाया है

बता दें कि CBI ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को 26 जून 2024 को गिरफ्तार कर लिया था। वहीं कोर्ट ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के अलावा आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया, BRS नेता के कविता समेत अन्य आरिपियों की 31 जुलाई 2024 तक न्यायिक हिरासत बढ़ा दी थी।  

जानकारी के लिए बताना चाहेंगे कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले से बड़ा झटका लगा है।  दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को यह बड़ा झटका, एल्डरमैन को नियुक्त करने के मामले में दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने MCD में 10 एल्डरमैन को उपराज्यपाल द्वारा मनोनीत करने के फैसले पर अपनी मुहर लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ साफ कहा कि उपराज्यपाल को इसके लिए दिल्ली के मंत्रीपरिषद की सलाह लेने की कोई आवश्यकता नहीं है। चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह फैसला सुनाया है। 

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