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Friday, March 13, 2026
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शुक्र है कि आपने पानी का चालन नहीं काटा……आखिर हाईकोर्ट ने क्यों लगाई दिल्ली पुलिस को फटकार ?

दिल्ली के कोचिंग सेंटर में जलभराव से सिविल सेवा के 3 छात्रों की मौत के मामले में दिल्ली पुलिस ने एक थार चालक को गिरफ्तार कर लिया था। इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर में स्थित एक कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भरने से सिविल सेवा की तैयारी कर रहे 3 छात्रों की मौत हो गई थी। इस मामले दिल्ली पुलिस ने एक थार चालक को गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस पर तंज कसते हुए कहा कि ‘शुक्र है कि आपने कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में घुसने के लिए बरसाती पानी का चालान नहीं काटा’।

दिल्ली पुलिस ने थार चालक को किया था गिरफ्तार

बता दें कि दिल्ली पुलिस ने पानी से भरी सड़क पर थार SUV चलाने वाले शख्स को गिरफ्तार कर लिया। जिसपर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस की आलोचना की और थार चालक मनुज कथूरिया को जमानत दे दी। हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी को मामले में अति उत्साह में फंसाया गया था। हाईकोर्ट ने आगे कहा कि भारत में ऐसे कई मामले हैं जिनमें भगवान को भी नोटिस दिया जा चुका है। हाल ही में छत्तीसगढ़ के एक सिविल कोर्ट में एक मंदिर से जुड़े भूमि विवाद में भगवान शिव को बुलाया गया था।

भगवान को कोर्ट में पेश होने के आदेश से संबंधित एक मामला बिहार से भी आया था। जब एक कोर्ट ने मंदिर के उचित प्रबंधन से संबंधित एक मामले में भगवान हनुमान को पेश होने के लिए कहा था। 

कोर्ट ने मंदिर में स्थापित मूर्तियों को दिया है व्यक्ति की मानता

गौरतलब है कि भारत में कोर्ट ने मंदिर में स्थापित देवता व मूर्तियों को कानूनी व्यक्ति के रूप में मान्यता दी है। जो संपत्ति रखने और मुकदमा दायर करने में सक्षम हैं। प्रमथ नाथ मलिक बनाम प्रद्युम्न कुमार मलिक (1925) और योगेंद्र नाथ नस्कर बनाय आयकर आयुक्त (1969) जैसे ऐतिहासिक मामलों में कोर्ट ने मूर्तियों के न्यायिक व्यक्तित्व को बरकरार रखा। 

उत्कल ठाकुर मामले में उड़ीसा हाईकोर्ट ने दिया था ऐतिहासिक फैसला

इसके अलावा 2010 में उत्कल ठाकुर मामले में उड़ीसा हाईकोर्ट ने एक कानूनी व्यक्ति के रूप में मूर्ति के अधिकारों को दोहराया। इस केस में भूमि पर देवता के वैध दावे की रक्षा करनी थी। क्योंकि राज्य सरकार ने जबरन देवता की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की थी। रामजन्मभूमि मामले में भी इसी तर्क को लागू किया गया था।

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