नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। हाल ही में ‘नो बिंदी, नो तिलक’ विवाद के बाद Lenskart ने अपने कर्मचारियों के लिए नई ‘इन-स्टोर स्टाइल गाइड’ जारी की है। कंपनी ने साफ किया है कि अब सभी धर्मों और संस्कृतियों के प्रतीकों का सम्मान किया जाएगा और कर्मचारियों को अपनी पहचान के साथ काम करने की पूरी आजादी होगी।
विवाद के बाद कंपनी ने लिया बड़ा फैसला
सोशल मीडिया पर आलोचना के बाद कंपनी ने अपने ड्रेस कोड नियमों की समीक्षा की। Peyush Bansal की अगुवाई वाली कंपनी ने कहा कि उसने ग्राहकों और कर्मचारियों की बात सुनी है और उसी के आधार पर नई गाइडलाइन लागू की गई है।
कंपनी का आधिकारिक बयान
कंपनी ने ‘X’ पर जारी बयान में कहा कि वह एक “प्राउड इंडियन कंपनी” है, जहां कर्मचारी अपनी परंपराओं और मान्यताओं के साथ काम करते हैं। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी को भी अपनी धार्मिक या सांस्कृतिक पहचान छोड़कर काम करने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा।
नई गाइडलाइन में क्या है अनुमति?
नई स्टाइल गाइड के तहत कर्मचारियों को कई तरह की छूट दी गई है। अब कर्मचारी बिंदी, तिलक, सिंदूर, मंगलसूत्र, कड़ा, हिजाब और पगड़ी जैसे धार्मिक प्रतीक पहन सकते हैं। इसके अलावा साफ-सुथरे कपड़े, कंपनी की टी-शर्ट और डार्क ब्लू जींस पहनने की अनुमति है। छोटे आभूषण जैसे झुमके, नोज पिन और अंगूठी भी पहने जा सकते हैं। सुरक्षा और स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए बंद जूते और मोजे पहनना जरूरी किया गया है।
किन चीजों पर लगाई गई है रोक?
प्रोफेशनल माहौल बनाए रखने के लिए कुछ चीजों पर सख्त पाबंदी लगाई गई है। फटे या रंग उड़े कपड़े, बड़े लोगो या ग्राफिक्स वाले आउटफिट, चप्पल या खुले जूते पूरी तरह बैन हैं। इसके अलावा बहुत बड़े या चमकीले आभूषण, अनप्रोफेशनल टोपी और आपत्तिजनक टैटू भी अनुमति नहीं हैं।
कर्मचारियों के लिए नई HR पॉलिसी
कंपनी ने कर्मचारियों के लिए शिकायत दर्ज करने का सुरक्षित सिस्टम भी बनाया है। अब कर्मचारी बिना किसी डर के HR के पास अपनी समस्या रख सकते हैं। धार्मिक, सांस्कृतिक या मेडिकल जरूरतों के मामलों में कर्मचारियों को विशेष सुविधा दी जाएगी और किसी भी तरह का भेदभाव नहीं किया जाएगा।
टकराव की स्थिति में क्या होगा?
अगर किसी कर्मचारी की व्यक्तिगत मान्यताओं और ड्रेस कोड के बीच टकराव होता है, तो उसे बातचीत के जरिए सुलझाया जाएगा। कंपनी ने यह भी स्वीकार किया है कि पहले के नियमों से कुछ कर्मचारियों को असुविधा हुई थी। नो बिंदी, नो तिलक विवाद के बाद Lenskart का यह कदम उसकी छवि सुधारने की दिशा में अहम माना जा रहा है। नई स्टाइल गाइड से साफ है कि कंपनी अब प्रोफेशनलिज्म के साथ-साथ सांस्कृतिक विविधता और कर्मचारियों की भावनाओं का भी पूरा सम्मान करना चाहती है।




