नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए विवादित बयान के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार के रुख पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट को एसआईटी ने बताया कि उसने मंत्री विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी थी, लेकिन राज्य सरकार ने अब तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया है। यह मामला ऑपरेशन सिंदूर के बाद सामने आया था, जब मंत्री विजय शाह के बयान को लेकर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। बाद में विजय शाह ने इस एफआईआर को रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हैरानी जताई कि पिछले साल अगस्त से अब तक एसआईटी की अनुमति संबंधी अर्जी पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। कोर्ट ने राज्य सरकार को इस पर जल्द फैसला लेने का निर्देश दिया। जब विजय शाह के वकील ने दलील दी कि मंत्री माफी मांग चुके हैं, तो कोर्ट ने साफ कहा कि रिकॉर्ड में कोई माफीनामा मौजूद नहीं है और अब इस स्तर पर माफी की बात करना बहुत देर से किया गया प्रयास है।
CJI सूर्यकांत ने मप्र सरकार को लगाई फटकार
इस मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि एसआईटी ने मंत्री विजय शाह के खिलाफ कार्रवाई के लिए राज्य सरकार से अनुमति मांगी थी, लेकिन अब तक उस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि एसआईटी की रिपोर्ट कोर्ट में पेश हो चुकी है और उस पर विचार चल रहा था। CJI सूर्यकांत ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि 19 अगस्त 2025 से लेकर अब 19 जनवरी तक सरकार कोई निर्णय नहीं ले पाई है। उन्होंने कहा कि एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट सील कवर में दाखिल की थी, जिसे बाद में ओपन कोर्ट में खोला गया। रिपोर्ट से यह भी सामने आया कि एसआईटी ने मामले से जुड़े कई पहलुओं की जांच की, हालांकि याचिकाकर्ता से जुड़े पुराने मामलों को इसमें शामिल नहीं किया गया।
मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने के बाद एसआईटी ने विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की सिफारिश करते हुए रिपोर्ट राज्य सरकार को भेज दी थी, जो अब भी लंबित है। कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वह कानून के मुताबिक मंजूरी देने की प्रक्रिया में तुरंत कदम उठाए। सुनवाई के दौरान खुफिया विभाग के डीआईजी डी. कल्याण चक्रवर्ती भी मौजूद थे। कोर्ट ने उनसे उन बिंदुओं पर ध्यान देने को कहा, जिनका उल्लेख अन्य याचिकाओं में किया गया है।
SC ने विजय शाह की माफी पर उठाए सवाल
विजय शाह की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट मनिंदन सिंह ने दलील दी कि याचिकाकर्ता माफी मांग चुके हैं और जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं। इस पर CJI सूर्यकांत ने सख्त रुख अपनाते हुए पूछा- माफीनामा कहां है? रिकॉर्ड में तो कुछ भी नहीं है और अब बहुत देर हो चुकी है।” CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि कोर्ट पहले ही उनके माफीनामे को देख चुका है और उस पर अपनी टिप्पणी भी कर चुका है। कोर्ट ने कहा कि पहले भी यह बताया गया था कि कानूनी रूप से माफी किस तरह मांगी जाती है। सुप्रीम कोर्ट ने विजय शाह की सार्वजनिक माफी को कानूनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास बताते हुए पहले ही खारिज कर दिया था और उसे “मगरमच्छ के आंसू” करार दिया था। बाद में दी गई उनकी ऑनलाइन माफी पर भी कोर्ट ने असंतोष जताया और साफ कर दिया कि ऐसे कदमों से कानूनी कार्रवाई से राहत नहीं मिल सकती।




