नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। लोकसभा स्पीकर के खिलाफ आम सरकार की तरह अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जाता। इसे हटाने का प्रस्ताव कहा जाता है, जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 94 के तहत लाया जाता है। हाल में विपक्ष द्वारा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ ऐसे प्रस्ताव की चर्चा तेज हुई है।
क्या है अनुच्छेद 94 की व्यवस्था?
संविधान के अनुच्छेद 94 के मुताबिक स्पीकर को तीन तरीकों से पद छोड़ना पड़ सकता है अगर वे लोकसभा के सदस्य नहीं रहते खुद इस्तीफा दे दें लोकसभा के सदस्यों के बहुमत से पारित प्रस्ताव द्वारा हटाए जाएं।
प्रस्ताव लाने की क्या हैं शर्तें?
कम से कम 14 दिन पहले लिखित नोटिस देना जरूरी नोटिस पर कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर होना जरूरी अचानक सदन में खड़े होकर प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता। जब स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव आता है तो वे खुद उस दिन सदन की अध्यक्षता नहीं करते। कार्यवाही डिप्टी स्पीकर या कोई वरिष्ठ सदस्य चलाता है।
हटाने के लिए कितना बहुमत चाहिए?
स्पीकर को हटाने के लिए विशेष बहुमत नहीं, बल्कि साधारण बहुमत काफी होता है। यानी जितने सांसद उपस्थित होकर वोटिंग करते हैं, उनमें 50% + 1 का समर्थन जरूरी होता है। अगर प्रस्ताव पास हो जाए तो क्या होगा स्पीकर तुरंत पद से हट जाएंगे वे सांसद बने रह सकते हैं इसके बाद नया स्पीकर चुना जाएगा आज तक स्वतंत्र भारत में किसी भी लोकसभा स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव पास नहीं हुआ। कई बार नोटिस दिए गए, बहस भी हुई, लेकिन मामला वोटिंग तक नहीं पहुंचा। विशेषज्ञों का मानना है कि स्पीकर के खिलाफ नोटिस लोकतांत्रिक असहमति दिखाने का तरीका ज्यादा रहा है। भारतीय राजनीति में यह अब तक प्रतीकात्मक हथियार ही साबित हुआ है।
नोटिस देने के बाद सदन में क्या होता है?
जब स्पीकर के खिलाफ हटाने का प्रस्ताव नोटिस के रूप में स्वीकार कर लिया जाता है, तो उस दिन स्पीकर खुद सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं करते हैं। उस समय सदन की कार्यवाही डिप्टी स्पीकर या लोकसभा के किसी वरिष्ठ सदस्य द्वारा संचालित की जाती है। यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि निष्पक्षता बनी रहे।




